Aavimukteshwaranand Controversy Live News Update: प्रयागराज में इस साल हुए माघ मेले में 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य और प्रशासन के बीच जमकर विवाद हुआ था. इस विवाद का खामियाजा अब शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती उठा रहे हैं. उनपर बच्चों से यौन शोषण करने का आरोप है. यहां तक कि बच्चों की मेडिकल रिपोर्ट में उनके साथ गलत काम होने की पुष्टि भी हो गई है. इधर, शंकराचार्य ने अग्रिम जमानत याचिका दायर की है, जिस पर आज हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है. इस मामले से जुड़े सारे अपडेट्स जानने के लिए न्यूज18 की इस लाइव कॉपी को पढ़ते रहिए.

आशुतोष ब्रह्माचारी का अविमुक्तेश्वरानंद पर गंभीर आरोप.
Aavimukteshwaranand Controversy: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती विवादों में घिरे हैं. बटुकों ने यौन शोषण का आरोप लगाते हुए प्रयागराज में केस दर्ज कराया है. मेडिकल परीक्षण में भी यौन उत्पीड़न की पुष्टि हो गई है. अविमुक्तेश्वरानंद पर अब गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है. ऐसे में वो और उनके शिष्य मुकुंदानंद ने गिरफ्तारी से बचने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया है. अब देखना होगा कि अदालत क्या फैसला सुनाती है. आइए जानते हैं इस मामले से जुड़े सारे अपडेट्स…
कोर्ट नंबर 72, सीरियल नंबर 142…
अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद की ओर से दायर जमानत याचिका पर शुक्रवार 27 फरवरी, यानी आज सुनवाई होनी है. यह याचिका कोर्ट नंबर 72 में लिस्टेड है और इसका सीरियल नंबर 142 है. दोपहर में लंच के बाद अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई हो सकती है.
रिटायर्ड जज करें जांज
माघ पूर्णिमा पर स्नान को लेकर शुरू हुआ शंकराचार्य का विवाद बटुकों के यौन शोषण जैसे गंभीर आरोपों तक आ गया है. आज इस मामले में शंकराचार्य के इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत पर भी सुनवाई है. आरोप प्रत्यारोप और जमानत की सुनवाई के बीच आज एक बार फिर मथुरा के संत दिनेश फलहारी महाराज पर निशाना साधा है और गंभीर आरोप लगाए हैं. साथ ही दिनेश फलहारी महाराज ने सारे मामले की हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज से जांच करने की मांग उठाई है.
राजा भैया की बेटी ने लिया शंकराचार्य का पक्ष
कुंडा विधायक राजा भैया की बेटी राघवी कुमारी ने अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में ट्वीट किया. उन्होंने इसे सनातन धर्म को बदनाम करने की साजिश बताया. उन्होंने कहा कि शंकराचार्य का पद वेदों की सर्वोच्च आध्यात्मिक परंपरा है और इस पर आघात बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

