बहराइच में बाल विवाह की मार झेल रही बालिकाएं! साल 2025-26 में 200 बालिकाओं को कराया गया बाल विवाह से मुक्त..जानिए कैसे

UTTAR PRADESH

बहराइच: वर्ष 2006 में बाल विवाह निषेध अधिनियम लागू किया गया, जिसके तहत भारत को बाल विवाह और बाल श्रम जैसे अपराधों से मुक्त करने तथा लोगों को जागरूक करने की जिम्मेदारी सरकार ने उठाई. इस कानून का असर भी देखने को मिला है. अकेले बहराइच जिले में वर्ष 2025-26 के दौरान लगभग 200 बाल विवाह के मामलों को रोका गया है.

क्या है बाल विवाह, इसे रोकना क्यों जरूरी है?

बाल विवाह और बाल श्रम के बारे में लगभग सभी लोग जानते हैं, लेकिन जानकारी होने के बावजूद कुछ लोग इस तरह का अपराध कर बैठते हैं. पहले पुरानी प्रथा के कारण बच्चियों की शादी बालिग होने से पहले ही कर दी जाती थी. इससे कई बार कम उम्र में गर्भधारण के कारण गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं और मृत्यु तक हो जाती थी.

लड़कियों के शारीरिक और मानसिक रूप से परिपक्व होने की एक निश्चित आयु होती है. यदि उससे पहले विवाह कर दिया जाए तो वे न तो घर-गृहस्थी संभाल पाती हैं और न ही सुरक्षित मातृत्व के लिए तैयार होती हैं. कई मामलों में जच्चा-बच्चा दोनों की जान जोखिम में पड़ जाती है. बाद में माता-पिता को पछताना पड़ता है.

पहले परिवारों में बच्चों के जन्म के समय ही रिश्ते तय कर दिए जाते थे, लेकिन समय के साथ जागरूकता बढ़ी है. सरकार ने भी सख्त दंड का प्रावधान किया है. इसके बावजूद आज भी कुछ पिछड़े ग्रामीण क्षेत्रों में बाल विवाह के मामले सामने आते हैं. इन्हें रोकने के लिए सीडब्ल्यूसी (CWC) और संबंधित विभाग लगातार कार्रवाई कर रहे हैं. बहराइच जिले में लगभग 200 बच्चियों को बाल विवाह से मुक्त कराया गया है.

क्या है बाल श्रम?

बाल श्रम भी एक गंभीर अपराध है. कई माता-पिता आर्थिक मजबूरी में बच्चों को कम उम्र में काम पर लगा देते हैं, जबकि यह उनकी पढ़ाई-लिखाई की उम्र होती है. बाजार, फैक्ट्रियों, होटलों और अन्य स्थानों पर आज भी कई बच्चे काम करते देखे जाते हैं.

बाल श्रम विभाग समय-समय पर अभियान चलाकर बच्चों को मुक्त कराता है, लेकिन चोरी-छिपे कई जगहों पर अब भी बच्चों से काम कराया जाता है.

काम करने की भी एक उचित आयु होती है. जब बच्चा बाल्यावस्था से वयस्कता की ओर बढ़ता है और उसे सही-गलत की समझ हो जाती है, तभी वह काम करने योग्य माना जाता है. कम उम्र में काम कराना शोषण की श्रेणी में आता है.

यूपी समेत बहराइच में 100 दिन का अभियान

उत्तर प्रदेश सहित बहराइच जिले में लगभग 100 दिनों का “बाल विवाह मुक्त अभियान” चलाया जा रहा है. इस अभियान के तहत विभिन्न क्षेत्रों में जाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है और बाल विवाह की सूचना मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जा रही है.

यह अभियान 27 नवंबर से शुरू होकर 8 मार्च तक चलेगा. इसका उद्देश्य लोगों में जागरूकता बढ़ाना और बाल विवाह जैसी कुप्रथा को जड़ से समाप्त करना है.

भारत में बाल विवाह एक गंभीर सामाजिक समस्या

भारत में बाल विवाह कानूनी रूप से प्रतिबंधित होने के बावजूद अब भी एक गंभीर सामाजिक समस्या है. इससे शिक्षा में बाधा, कम उम्र में गर्भधारण के कारण स्वास्थ्य जोखिम और आर्थिक व व्यक्तिगत विकास में रुकावट जैसी समस्याएं पैदा होती हैं.

Prohibition of Child Marriage Act को 1929 के पूर्व बाल विवाह निवारण अधिनियम की कमियों को दूर करने के लिए लागू किया गया था.

बहराइच के मरी माता मंदिर में अधिक आते हैं मामले

देहात इंडिया संस्था में कार्यरत विंध्यवासिनी ने बताया कि बहराइच शहर स्थित मरी माता में कई बार बाल विवाह के मामले सामने आते हैं.

शादी के समय जब जोड़ों के दस्तावेज जांचे जाते हैं तो कई बार वे नाबालिग पाए जाते हैं. ऐसी स्थिति में कार्रवाई कर विवाह रुकवाया जाता है. कई बार ग्रामीण क्षेत्रों में शादी की पूरी तैयारी हो चुकी होती है, जिससे उसे रुकवाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है. कभी-कभी विवाद की स्थिति भी बनती है, लेकिन टीम पीछे नहीं हटती और बाल विवाह रुकवाकर ही रहती है.

कई बार हो जाती है गलतफहमी

विंध्यवासिनी ने बताया कि कई बार जोड़े देखने में कम उम्र के लगते हैं, लेकिन दस्तावेजों में वे बालिग होते हैं. ऐसी स्थिति में शादी रुकवाने के बाद दस्तावेज जांच में सही उम्र सामने आने पर अफसोस भी होता है. बाद में ऐसे जोड़ों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाकर सामूहिक विवाह योजनाओं में शामिल कराया जाता है.

इस तरह प्रशासन और सामाजिक संस्थाएं मिलकर बाल विवाह और बाल श्रम जैसी कुप्रथाओं को खत्म करने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं.

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