यह पूरा मामला पश्चिम बंगाल के कूचबिहार (Cooch Behar) जिले के सीमावर्ती गांव का है, जहां देश की सुरक्षा और घुसपैठ रोकने के लिए स्थानीय ग्रामीणों ने खुद आगे आकर बॉर्डर फेंसिंग (कटीले तारों की बाड़) के लिए अपनी जमीन दान कर दी है।
ग्रामीणों के इस बड़े कदम और इससे जुड़े मुख्य बिंदुओं की पूरी जानकारी नीचे दी गई है:
ग्रामीणों ने क्यों उठाया यह कदम?
- असुरक्षा और डर का माहौल: स्थानीय निवासी बिकाश राय और अन्य ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से डर के साए में जी रहे थे। बाड़ न होने के कारण रात के अंधेरे में सीमा पार से लोग आते थे।
- चोरी और तस्करी से परेशान: सीमावर्ती इलाकों में लगातार मवेशियों (मवेशी चोरी) और फसलों का नुकसान हो रहा था।
- देश और गांव की सुरक्षा: ग्रामीणों का मानना है कि फेंसिंग पूरी होने से न केवल उनका गांव सुरक्षित होगा, बल्कि देश की सुरक्षा भी मजबूत होगी।
जमीन सौंपने की पूरी प्रक्रिया
- स्वैच्छिक योगदान: कूचबिहार के मथाभांगा ब्लॉक के सतग्राम मानबारी इलाके में ग्रामीणों ने लगभग 33 डेसिमल निजी जमीन स्वैच्छिक रूप से प्रशासन और सीमा सुरक्षा बल (BSF) को सौंपी है।
- मुआवजे की प्रक्रिया: ग्रामीणों के अनुसार, जमीन का सर्वे पूरा हो चुका है और मुआवजे की कागजी कार्रवाई प्रक्रिया में है, जिसकी राशि जल्द ही उनके खातों में आएगी।
- सरकारी मुहिम में तेजी: पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पहली कैबिनेट बैठक (11 मई 2026) में ही भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के लिए 600 हेक्टेयर (लगभग 600 एकड़) जमीन BSF को ट्रांसफर करने की मंजूरी दी थी।
- शाह का संदेश: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि राज्य सरकार ने केवल 7 दिनों के भीतर 600 हेक्टेयर और सामरिक रूप से संवेदनशील ‘चिकन्स नेक’ (सिलिगुड़ी कॉरिडोर) इलाके की 121 हेक्टेयर जमीन केंद्र को सौंप दी है, जिससे फेंसिंग के काम में अभूतपूर्व तेजी आई है।
- भारत और बांग्लादेश के बीच पश्चिम बंगाल में 2,217 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा लगती है, जिसका करीब 600 किलोमीटर का हिस्सा अब तक बिना बाड़ (unfenced) का था। ग्रामीणों के इस सहयोग और प्रशासनिक सक्रियता से अब इन संवेदनशील पैच पर तेजी से काम हो रहा है।

