आईआईटी बीएचयू (IIT BHU) के वैज्ञानिकों ने एक शोध में खुलासा किया है कि कैसे गाजर के पिगमेंट (बीटा-कैरोटीन) का इस्तेमाल करके पाम ऑयल और सूअर की चर्बी को असली गाय के घी जैसा दिखाया जा सकता है

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आईआईटी (बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी) के शोधकर्ताओं ने अपनी हालिया रिसर्च में मिलावटखोरी के एक बेहद खतरनाक और आधुनिक तरीके का पर्दाफाश किया है। इसके तहत गाजर के प्राकृतिक पिगमेंट (बीटा-कैरोटीन) का इस्तेमाल करके पाम ऑयल और सूअर की चर्बी (Lard) को हूबहू गाय के असली सुनहरे घी जैसा बदला जा रहा है, जिससे प्रयोगशालाओं (Labs) के बड़े-बड़े शुद्धता जांचने वाले टेस्ट भी पूरी तरह फेल हो जाते हैं।

इस हैरान कर देने वाली वैज्ञानिक जांच, लैब टेस्ट के फेल होने की वजह और असली-नकली की पहचान के तरीके नीचे विस्तार से दिए गए हैं:

🔬 कैसे काम करता है यह मिलावट का खेल?

  • कलर मास्किंग एजेंट: मिलावटखोर पाम ऑयल या सूअर की चर्बी को असली गाय के घी जैसा पीला-नारंगी रंग देने के लिए गाजर के अर्क (Extract) का उपयोग करते हैं।
  • रमन टेस्ट को चकमा: खाद्य नियामक और लैब्स शुद्धता जांचने के लिए रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी (Raman Spectroscopy) का उपयोग करते हैं, जो गाय के दूध में प्राकृतिक रूप से मिलने वाले बीटा-कैरोटीन के तीन खास सिग्नल्स (1006, 1157, और 1520 -1) को ट्रैक करता है।
  • नामात्र की मात्रा: वैज्ञानिकों ने पाया कि सिर्फ 1 ग्राम चर्बी में महज 0.22 मिलीग्राम गाजर का अर्क मिलाने पर भी एडवांस रमन टेस्ट धोखा खा जाता है और उसे असली घी घोषित कर देता है।
  • ऐसे खुली पोल: जब वैज्ञानिकों ने एक और भी एडवांस टेस्ट FTIR स्पेक्ट्रोस्कोपी (FTIR Spectroscopy) किया, तब जाकर पता चला कि अंदर का फैट पाम ऑयल या चर्बी ही है, बस ऊपर से केमिकल सिग्नल्स की नकल की गई थी।

🚨 सेहत के लिए कितना बड़ा खतरा?

यद्यपि गाजर सेहत के लिए अच्छी होती है, लेकिन यहाँ इसका उपयोग खतरनाक ट्रांस-फैट और पाम ऑयल के बेस को छिपाने के लिए किया जा रहा है। ऐसा नकली घी खाने से धमनियों में ब्लॉकेज और दिल से जुड़ी गंभीर बीमारियों (Cardiovascular Risks) का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।


💡 घर पर असली और नकली घी पहचानने के 5 आसान तरीके

आईआईटी के वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों के अनुसार, आप घर पर इन सरल परीक्षणों से घी की शुद्धता जांच सकते हैं:

  1. हथेली टेस्ट: थोड़ा सा घी अपनी हथेली पर रगड़ें। अगर यह शरीर की सामान्य गर्मी से तुरंत पिघल जाए तो असली है, क्योंकि शुद्ध घी का मेल्टिंग पॉइंट कम होता है।
  2. फ्रिज टेस्ट (परत जांच): कांच के एक बर्तन में पिघला हुआ घी डालकर फ्रिज में जमने के लिए रख दें। जमने के बाद यदि घी में दो अलग-अलग परतें (Layers) दिखाई दें, तो समझ लें कि इसमें अन्य तेल या पाम ऑयल मिलाया गया है।
  3. गर्म करने पर रंग: एक चम्मच घी को बर्तन में तेज आंच पर गर्म करें। यदि घी तुरंत पिघलकर गहरे भूरे (Dark Brown) रंग का हो जाए, तो वह शुद्ध है। देर से पिघलना और पीला या सफेद बना रहना मिलावट की निशानी है।
  4. आयोडीन टेस्ट (स्टार्च की पहचान): पिघले हुए घी में दो बूंद आयोडीन का घोल (Iodine Solution) मिलाएं। यदि घी का रंग बदलकर नीला (Blue) हो जाता है, तो इसका मतलब है कि वजन बढ़ाने के लिए इसमें आलू या स्टार्च मिक्स किया गया है।
  5. टेक्सचर और खुशबू: असली गाय का घी छूने पर दानेदार (Granular) महसूस होता है और उसकी एक विशिष्ट सोंधी महक होती है। नकली घी अक्सर चिपचिपा, मोम जैसा होता है और उसमें खुशबू नहीं होती।

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