राजस्थान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने अपनी मांगों को लेकर राज्य सरकार और तेल कंपनियों के खिलाफ 1 जून 2026 से प्रदेशव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का अल्टीमेटम दिया है. यदि सरकार और तेल कंपनियों द्वारा समय रहते मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो पूरे राजस्थान में पेट्रोल-डीजल की सप्लाई और बिक्री ठप हो सकती है.
🚨 हड़ताल की मुख्य वजहें और मांगें
पंप संचालकों की नाराजगी के पीछे तीन बड़े कारण हैं:
- वैट (VAT) कम करने की मांग: राजस्थान में पेट्रोल-डीजल पर लगने वाला वैट पड़ोसी राज्यों की तुलना में काफी ज्यादा है. एसोसिएशन की मांग है कि राज्य सरकार वैट दरों में कम से कम 5% की कटौती करे ताकि कीमतें पंजाब के बराबर आ सकें.
- सप्लाई में कटौती का विवाद: तेल कंपनियों (जैसे IOCL) ने डिपो से पेट्रोल पंपों को दी जाने वाली ईंधन की सप्लाई में अचानक कमी कर दी है.
- बिक्री पर सीमा तय करना: डीलर्स का आरोप है कि तेल कंपनियां मोबाइल मैसेज और मौखिक निर्देशों के जरिए ग्राहकों को सीमित मात्रा में ही तेल बेचने का दबाव बना रही हैं. तय सीमा से ज्यादा तेल बेचने पर पंप बंद करने की कार्रवाई की धमकियां मिल रही हैं.
- बढ़ती लागत और घाटा: ईंधन महंगा होने और वैट अधिक होने के कारण सीमावर्ती इलाकों के लोग पड़ोसी राज्यों से तेल भरवा रहे हैं, जिससे राजस्थान के पंप मालिकों की बिक्री घट गई है और उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है
⚠️ आम जनता पर क्या असर होगा?
अगर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सरकार को दिए गए 4 दिन के अल्टीमेटम के भीतर इस संकट का समाधान नहीं निकलता है, तो इसका सीधा असर निम्नलिखित क्षेत्रों पर पड़ेगा:
- आम यातायात: निजी वाहनों और सार्वजनिक बसों का संचालन प्रभावित होगा.
- खेती-किसानी: ट्रैक्टरों और कृषि उपकरणों के लिए किसानों को डीजल नहीं मिल पाएगा.
- सप्लाई चेन: मालवाहक ट्रकों के पहिए थमने से आवश्यक वस्तुओं और बाजारों पर असर पड़ सकता है
एसोसिएशन ने साफ किया है कि अचानक लागू किए जा रहे इन नियमों से जनता में कानून-व्यवस्था बिगड़ने का खतरा है, इसलिए सरकार तुरंत इस मामले में दखल दे !

