दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रसिद्ध व्यंग्यात्मक (satirical) सोशल मीडिया हैंडल ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के एक्स (X) अकाउंट को भारत में ब्लॉक किए जाने के मामले में केंद्र सरकार और एक्स (X) को नोटिस जारी किया है।
हालांकि, कोर्ट ने फिलहाल इस सोशल मीडिया अकाउंट को तुरंत बहाल (रिस्टोर) करने से साफ इनकार कर दिया है।
दिल्ली हाईकोर्ट की सुनवाई से जुड़े मुख्य अपडेट और बड़ी बातें निम्नलिखित हैं:
1. तुरंत अंतरिम राहत देने से हाईकोर्ट का इनकार
- सरकार का पक्ष सुनना जरूरी: जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव की पीठ ने कहा कि किसी सोशल मीडिया अकाउंट को ब्लॉक करने और उसे बहाल करने जैसे मामलों के दूरगामी और व्यापक परिणाम होते हैं। इसलिए अदालत सरकार और अन्य संबंधित पक्षों का जवाब सुनने के बाद ही कोई अंतिम फैसला लेगी।
- कंटेंट को बताया आपत्तिजनक: अदालत ने मौखिक तौर पर टिप्पणी की कि पहली नज़र में इस अकाउंट का कंटेंट कुछ हद तक आपत्तिजनक प्रतीत होता है। केवल कुछ पोस्ट नहीं, बल्कि पूरे अकाउंट की गतिविधि को देखते हुए तुरंत राहत देने से मना कर दिया गया।
2. इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय की रिव्यू कमेटी को निर्देश
- मामले की दोबारा जांच के आदेश: हाईकोर्ट ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की समीक्षा समिति (Review Committee) को निर्देश दिया है कि वह याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए सभी कानूनी पहलुओं की गहराई से जांच करे।
- आईटी नियम 14 का हवाला: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आईटी नियमों के नियम 14 के तहत इस कमेटी के पास ब्लॉकिंग आदेशों की हर दो महीने में समीक्षा करने का अधिकार है। यदि कमेटी संतुष्ट होती है, तो वह अकाउंट बहाल करने की सिफारिश कर सकती है।
- वर्चुअल पेशी की छूट: चूंकि याचिकाकर्ता और सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके फिलहाल विदेश में हैं, इसलिए अदालत ने उन्हें रिव्यू कमेटी के सामने वर्चुअली पेश होकर अपना पक्ष रखने की अनुमति दी है।
3. याचिकाकर्ता और सरकार की दलीलें
- याचिकाकर्ता का पक्ष: अभिजीत दीपके की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अखिल सिब्बल ने दलील दी कि यह प्लेटफॉर्म शुद्ध रूप से युवाओं की आवाज़ उठाने वाला एक व्यंग्यात्मक डिजिटल आंदोलन था। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना याचिकाकर्ता का पक्ष सुने या बिना किसी पूर्व नोटिस के सीधे पूरा अकाउंट ब्लॉक करना पूरी तरह से अभिव्यक्ति की आज़ादी का उल्लंघन है।
- सरकार का पक्ष: केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और एएसजी उपस्थित हुए। सरकार का स्टैंड है कि इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) से मिले इनपुट्स और राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आईटी एक्ट की धारा 69ए के तहत यह कार्रवाई की गई थी।
आगे क्या होगा?
दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को अपना विस्तृत जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई अब 6 जुलाई को होगी, जहां रिव्यू कमेटी की रिपोर्ट और सरकार के जवाब को रिकॉर्ड पर रखकर आगे विचार किया जाएगा।

