UP Cabinet: किसानों को मिलेंगे अतिरिक्त पैसे, पानी का नहीं होगा दुरुपयोग, जाम के लिए नई योजना; पढ़ें अहम फैसले

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सीएम योगी की अध्यक्षता में यूपी कैबिनेट ने गेहूं खरीद, नवयुग पालिका योजना, आधुनिक बिजनेस पार्क, मल्टीमोडल लॉजिस्टिक्स पार्क और प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक शेड्स परियोजनाओं को मंजूरी दी। योजनाओं से किसानों, नगरीय विकास और औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार सृजन और डिजिटल सेवाएं सुनिश्चित होंगी। 

सीएम योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को लोकभवन में  कैबिनेट बैठक हुई। इसमें 39 प्रस्ताव पेश किए गए, जिनमें से 37 प्रस्तावों पर मोहर लगी।  जबकि 2 प्रस्तावों (प्रस्ताव संख्या 20 और 21) को स्थगित कर दिया गया है। बैठक का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु प्रदेश के किसान रहे। सरकार ने आगामी रबी विपणन सत्र के लिए गेहूं खरीद की नीति स्पष्ट कर दी है, जिससे अन्नदाताओं की आय में सीधा इजाफा होगा।

वहीं, कृषि मंत्री ने कहा कि उतराई, छनाई व सफाई के लिए किसानों को 20 रुपये प्रति कुंतल अलग से दिया जाएगा। किसानों ने इस साल प्रदेश के भीतर काफ़ी अच्छी फसल लगाई है। कृषि विभाग ने उन्हें पर्याप्त मात्रा में बीज भी उपलब्ध कराए हैं। पर्याप्त मात्रा में इसकी खरीद की जाए, जिससे किसानों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं उठाना पड़े।

औद्योगिक विकास प्राधिकरण सेवा नियमावली-2026 को मंजूरी, वेतन व सेवा शर्तों में एकरूपता

प्रदेश मंत्रिपरिषद ने राज्य के औद्योगिक विकास प्राधिकरणों की सेवा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से “औद्योगिक विकास प्राधिकरण केंद्रीयकृत सेवा (द्वितीय संशोधन) नियमावली, 2026” को मंजूरी दे दी है। इस निर्णय के साथ वर्ष 2018 में लागू नियमावली में व्यापक संशोधन का रास्ता साफ हो गया है।

सरकार के इस फैसले का मुख्य उद्देश्य विभिन्न औद्योगिक प्राधिकरणों, विशेष रूप से नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के बीच वेतनमान, भत्तों और सेवा शर्तों में मौजूद असमानताओं को खत्म करना है। नई नियमावली लागू होने के बाद इन संस्थाओं में कार्यरत कार्मिकों को समान अवसर और बेहतर सेवा संरचना मिल सकेगी।

प्रस्ताव के अनुसार, 2018 की नियमावली में समय-समय पर किए गए संशोधनों के बावजूद कई विसंगतियां बनी हुई थीं, जिन्हें दूर करने के लिए यह द्वितीय संशोधन लाया गया है। संशोधित नियमावली के तहत सेवा शर्तों को अधिक स्पष्ट, संगठित और प्रतिस्पर्धी बनाया जाएगा, जिससे प्रशासनिक दक्षता में सुधार होने की उम्मीद है।

कैबिनेट के इस निर्णय से न केवल कर्मचारियों के मनोबल में वृद्धि होगी, बल्कि औद्योगिक विकास प्राधिकरणों की कार्यप्रणाली भी अधिक सुव्यवस्थित और परिणामोन्मुख बनेगी। सरकार का मानना है कि एकरूप सेवा ढांचा निवेशकों के लिए बेहतर माहौल तैयार करेगा और औद्योगिक परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी।

राज्य सरकार लंबे समय से औद्योगिक विकास को गति देने के लिए नीतिगत सुधारों पर जोर दे रही है। इसी कड़ी में यह निर्णय महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो प्राधिकरणों को अधिक सक्षम, जवाबदेह और निवेश-अनुकूल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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यूपी कैबिनेट की बैठक में फैसला

निजी बिजनेस पार्क नीति-2025 को कैबिनेट की मंजूरी

उत्तर प्रदेश सरकार ने औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देने के लिए ‘उत्तर प्रदेश निजी बिजनेस पार्क विकास योजना-2025’ को मंजूरी दे दी है। कैबिनेट के इस फैसले से प्रदेश में विश्वस्तरीय प्लग-एंड-प्ले बिजनेस पार्क विकसित करने का मार्ग प्रशस्त हो गया है, जिससे निवेश आकर्षण, औद्योगिक गतिविधियों और रोजगार सृजन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की उम्मीद जताई जा रही है।

योजना के तहत प्रदेश में ऐसे आधुनिक बिजनेस पार्क स्थापित किए जाएंगे, जहां वैश्विक कंपनियों के लिए कार्यालय, अनुसंधान एवं विकास (R&D) केंद्र, लॉजिस्टिक्स हब, साझा सेवाएं और संचालन सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी। सरकार का मानना है कि रेडी-टू-यूज अवसंरचना की उपलब्धता से परियोजनाओं के क्रियान्वयन में होने वाली देरी और लागत वृद्धि को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।

वर्तमान में उपयुक्त और तैयार औद्योगिक अवसंरचना के अभाव में निवेश प्रस्तावों को जमीन पर उतरने में समय लगता है, जिससे निवेशकों की रुचि प्रभावित होती है। इस योजना के माध्यम से इस समस्या का समाधान करते हुए राज्य को निवेश के लिए अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया जाएगा। इसके साथ ही सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) और स्टार्टअप्स को भी आधुनिक सुविधाओं से युक्त कार्यस्थल उपलब्ध होंगे, जिससे औद्योगिक क्लस्टरिंग को बढ़ावा मिलेगा।

योजना के क्रियान्वयन के लिए DBFOT (डिजाइन, निर्माण, वित्त, संचालन और हस्तांतरण) मॉडल अपनाया जाएगा, जिसमें निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। प्रत्येक बिजनेस पार्क को 45 वर्षों की रियायत अवधि के लिए विकसित किया जाएगा, जिसे आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त 45 वर्षों तक बढ़ाया भी जा सकता है। रियायत अवधि समाप्त होने के बाद विकसित परिसंपत्तियां राज्य सरकार को हस्तांतरित कर दी जाएंगी।

भूमि प्रबंधन के तहत प्रत्येक पार्क के लिए न्यूनतम 10 एकड़ भूमि चिन्हित की जाएगी, जबकि विशेष स्थानों पर भूमि की उपलब्धता और उपयोगिता के आधार पर इसमें लचीलापन रखा जाएगा। योजना की वित्तीय संरचना में अपफ्रंट लैंड प्रीमियम, राजस्व साझेदारी और अन्य वित्तीय प्रावधान शामिल किए गए हैं, जिससे परियोजनाओं की वित्तीय व्यवहार्यता सुनिश्चित की जा सके।

योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संबंधित औद्योगिक विकास प्राधिकरणों या सरकारी भूमि स्वामित्व वाली एजेंसियों को नोडल भूमिका दी जाएगी। ये एजेंसियां आवेदन आमंत्रित करने, बोली प्रक्रिया संचालित करने और प्रस्तावों के तकनीकी व वित्तीय मूल्यांकन की जिम्मेदारी निभाएंगी। इसके लिए एक स्क्रीनिंग समिति का गठन किया जाएगा, जो निर्धारित मानकों के आधार पर प्रस्तावों का परीक्षण कर अंतिम अनुशंसा करेगी।

इसके अलावा, चयनित डेवलपर्स को परियोजना की प्रगति, व्यय और निर्धारित समयसीमा के अनुपालन की नियमित रिपोर्ट संबंधित प्राधिकरण को प्रस्तुत करनी होगी, जिससे परियोजनाओं की निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।

गंगा एक्सप्रेसवे किनारे इंडस्ट्रियल क्लस्टर को कैबिनेट की मंजूरी

प्रदेश सरकार ने औद्योगिक विकास को नई गति देने के उद्देश्य से एक अहम फैसला लेते हुए गंगा एक्सप्रेसवे के समीप इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के तहत इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर के विकास को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना के तहत संभल जनपद में आधुनिक औद्योगिक अवसंरचना विकसित की जाएगी, जिससे क्षेत्र में निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

यूपीडा द्वारा विकसित विभिन्न एक्सप्रेस-वे आगरा-लखनऊ, पूर्वांचल, बुंदेलखंड, गोरखपुर लिंक और गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे कुल 29 स्थानों पर ऐसे क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में संभल में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक क्लस्टर परियोजना के अंतर्गत सड़क, आरसीसी नाली, तालाब, आरएमसी प्लांट, फायर स्टेशन, ओवरहेड जलाशय, वाटर सप्लाई लाइन, फेंसिंग, विद्युत एवं अन्य बुनियादी सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा।

परियोजना की कुल प्रस्तावित लागत 293.59 करोड़ रुपये है, जबकि व्यय वित्त समिति द्वारा 245.42 करोड़ रुपये की धनराशि को अनुमोदित किया गया है, जिसे अब कैबिनेट की स्वीकृति मिल गई है। सरकार का मानना है कि इस पहल से प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और एक्सप्रेसवे के किनारे आर्थिक विकास के नए केंद्र विकसित होंगे।

ग्रेटर नोएडा में 174.12 एकड़ में विकसित होगा मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए “उत्तर प्रदेश मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क नीति-2024” के तहत ग्रेटर नोएडा में प्रस्तावित मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क (एमएमएलपी) की स्थापना के लिए 174.12 एकड़ भूमि के आवंटन से संबंधित नियमों और शर्तों सहित प्रस्ताव को मंत्रिपरिषद की मंजूरी दे दी है। यह भूमि सेक्टर-कप्पा-02, ग्रेटर नोएडा में स्थित है और परियोजना को राज्य की लॉजिस्टिक्स क्षमता बढ़ाने वाली महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना परियोजनाओं में शामिल माना जा रहा है।

कैबिनेट के निर्णय के अनुसार, इस मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क परियोजना में न्यूनतम 1000 करोड़ का निवेश अनिवार्य होगा। पात्र निवेशकों को नीति-2024 के तहत 30 प्रतिशत तक फ्रंट-एंड भूमि सब्सिडी प्रदान की जाएगी। यह सब्सिडी केवल औद्योगिक विकास प्राधिकरण अथवा राज्य सरकार द्वारा लीज पर आवंटित भूमि पर ही अनुमन्य होगी। भूमि का आरक्षित मूल्य 11,000 प्रति वर्ग मीटर निर्धारित किया गया है और सब्सिडी की गणना इसी आरक्षित मूल्य के आधार पर की जाएगी।

सरकार द्वारा स्पष्ट किया गया है कि ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण इस परियोजना के लिए भूमि आवंटन ई-ऑक्शन मॉडल के माध्यम से करेगा। निविदा प्रक्रिया में भारत में पंजीकृत साझेदारी फर्म, सीमित देयता साझेदारी , निजी लिमिटेड तथा सार्वजनिक लिमिटेड कंपनियां भाग ले सकेंगी, जबकि कंसोर्टियम अथवा संयुक्त उद्यम को इसमें भाग लेने की अनुमति नहीं होगी। इससे परियोजना के लिए एकल और सक्षम निवेशक का चयन सुनिश्चित किया जाएगा।

कैबिनेट द्वारा स्वीकृत शर्तों के अनुसार चयनित डेवलपर को परियोजना को सात वर्षों की निर्धारित अवधि में पूर्ण करना होगा। साथ ही, शुरुआती तीन वर्षों में न्यूनतम 40 प्रतिशत विकास कार्य पूरा करना अनिवार्य रहेगा। यदि वास्तविक और उचित कारणों से देरी होती है, तो नियमानुसार अधिकतम दो वर्ष का अतिरिक्त समय दिया जा सकेगा। परियोजना के पूर्ण रूप से संचालित होने तथा निर्धारित निवेश प्रतिबद्धताओं की पूर्ति तक आवंटी को परियोजना से बाहर निकलने की अनुमति नहीं होगी।

उच्च स्तरीय प्राधिकृत समिति द्वारा 9 फरवरी 2026 को हुई बैठक में इस परियोजना से संबंधित नियमों और शर्तों को अनुमोदित किया गया था, जिसका कार्यवृत्त 6 मार्च 2026 को निर्गत किया गया। इसके बाद औद्योगिक विकास विभाग, ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के बोर्ड तथा मूल्यांकन समिति की संस्तुतियों के क्रम में प्रस्ताव को मंत्रिपरिषद के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जिसे स्वीकृति प्रदान कर दी गई।

राज्य सरकार का मानना है कि इस मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क के विकसित होने से दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में माल परिवहन की दक्षता बढ़ेगी, वेयरहाउसिंग और कोल्ड-चेन जैसी सुविधाओं का विस्तार होगा तथा उद्योगों को बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध होगी। इसके साथ ही परिवहन लागत में कमी आएगी और निर्यात-उन्मुख गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

नीति-2024 के तहत राज्य सरकार का लक्ष्य प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विकसित करना है। ग्रेटर नोएडा में प्रस्तावित यह एमएमएलपी परियोजना उसी रणनीति का हिस्सा है, जिसके माध्यम से औद्योगिक निवेश आकर्षित करने, रोजगार के अवसर सृजित करने और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को गति देने की उम्मीद की जा रही है।

 

UP Cabinet: Farmers to Receive Additional Funds, Prevention of Water Misuse, New Plan to Tackle Traffic Conges
कैबिनेट बैठक 

डीबीएफओटी मॉडल पर विकसित होंगे प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक शेड

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में औद्योगिक विकास को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के अंतर्गत डिजाइन-बिल्ड-फाइनेंस-ऑपरेट-ट्रांसफर (डीबीएफओटी) मॉडल पर प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक शेड्स के विकास हेतु वर्ष 2026 की योजना को मंजूरी दे दी है। मंत्रिपरिषद के इस निर्णय का उद्देश्य राज्य में औद्योगिकीकरण की गति तेज करना, विनिर्माण क्षमता का विस्तार करना तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को शीघ्र उत्पादन शुरू करने के लिए तैयार अवसंरचना उपलब्ध कराना है।

राज्य सरकार का यह कदम उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के जीएसडीपी (सकल राज्य घरेलू उत्पाद) के लक्ष्य तक पहुंचाने के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वर्तमान “लीज एवं बिल्ड” मॉडल में उद्यमियों को भूमि प्राप्त करने के बाद भवन, आंतरिक सड़कें, ड्रेनेज, एसटीपी/ईटीपी तथा अग्निशमन जैसी बुनियादी सुविधाओं पर भारी निवेश करना पड़ता है, जिससे उत्पादन शुरू होने में 18 से 36 महीने तक का समय लग जाता है। नई योजना के तहत इन चुनौतियों को कम करने के लिए पहले से विकसित औद्योगिक शेड उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे उद्योगों की स्थापना प्रक्रिया तेज होगी।

इस योजना का प्रमुख उद्देश्य पूर्व-निर्मित तथा आवश्यक उपयोगिताओं से युक्त औद्योगिक शेड्स के माध्यम से भूमि-आधारित औद्योगिक विकास को अधिक तेज, कुशल और रोजगारोन्मुख बनाना है। इसके साथ ही राज्य सरकार भूमि का स्वामित्व अपने पास रखते हुए निजी निवेश से अवसंरचना विकसित कराएगी। इससे उद्योगों की प्रारंभिक लागत कम होगी और उत्पादन शीघ्र प्रारंभ किया जा सकेगा।

योजना के तहत विकसित शेड्स में प्रमुख रूप से मेटल इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स, ईवी कंपोनेंट्स, ऑटो सहायक उद्योग, टेक्सटाइल/गारमेंट, फूड प्रोसेसिंग, प्लास्टिक एवं पैकेजिंग, डिफेंस एयरोस्पेस तथा ईएसडीएम जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी। आवश्यकता के अनुसार औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र-विशिष्ट आरक्षण तथा सीमित सहायक सुविधाएं भी प्रदान कर सकेगा।

डीबीएफओटी मॉडल के अंतर्गत निजी डेवलपर डिजाइन, वित्त, निर्माण, संचालन तथा हस्तांतरण का कार्य करेगा। इस योजना में कन्सेशन अवधि 45 वर्ष निर्धारित की गई है, जिसे अधिकतम 15 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। पायलट परियोजनाओं के लिए 15 से 20 एकड़ भूमि को प्राथमिकता दी जाएगी, जबकि न्यूनतम भूमि आकार 10 एकड़ प्रस्तावित है। परियोजना की अवधि पूर्ण होने अथवा समाप्ति की स्थिति में सभी परिसंपत्तियां उपयोग योग्य स्थिति में औद्योगिक विकास प्राधिकरण को हस्तांतरित कर दी जाएंगी, जबकि भूमि का स्वामित्व राज्य सरकार के पास ही रहेगा।

योजना के अंतर्गत न्यूनतम विकास दायित्व (एमडीओ) निर्धारित किए गए हैं, ताकि भूमि का अनावश्यक संचयन (होर्डिंग) रोका जा सके तथा समयबद्ध विकास सुनिश्चित किया जा सके। वित्तीय दृष्टि से भी योजना को राजकोषीय अनुशासन (फिस्कल प्रूडेंस) के अनुरूप तैयार किया गया है।

इस योजना के अंतर्गत किसी प्रकार की बजटीय सहायता, व्यवहार्यता अंतर अनुदान (वीजीएफ) अथवा राज्य सरकार की गारंटी प्रदान नहीं की जाएगी तथा राज्य पर कोई आकस्मिक देयता भी नहीं होगी। औद्योगिक विकास प्राधिकरण को एकमुश्त प्रीमियम, वार्षिक शुल्क तथा राजस्व साझेदारी (रेवेन्यू शेयर) के माध्यम से आय प्राप्त होगी।

सरकार का मानना है कि इस निर्णय से औद्योगिक भूमि का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा, निवेश आकर्षित होगा, उत्पादन गतिविधियां तेज होंगी तथा बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे। इससे उत्तर प्रदेश की औद्योगिक प्रतिस्पर्धात्मकता को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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