केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने इसे लोकतंत्र और शांतिपूर्ण जनआंदोलन की बड़ी जीत बताया है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व वाले छात्र आंदोलन में शामिल रहे वांगचुक ने गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी विस्तृत प्रतिक्रिया दी।
सोनम वांगचुक के बयान की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
1. ‘इस्तीफा सिर्फ एक शुरुआत है’
वांगचुक ने कहा कि “इस्तीफा तो बस एक शुरुआत है”। केवल एक व्यक्ति या चेहरे के बदलने से पूरी व्यवस्था रातों-रात नहीं सुधरती। यह इस्तीफा केवल व्यवस्था की जवाबदेही तय करने का पहला कदम है, असली चुनौती अब इसके बाद शुरू होगी जहां जमीन पर उतरकर बुनियादी काम करना होगा।
2. शिक्षा से लेकर शासन तक बदलाव की उम्मीद
उन्होंने उम्मीद जताई कि इस कदम के बाद देश में “अच्छे दिन” और सुधार का एक नया दौर शुरू होगा।
- व्यवस्था में सुधार: अगर इस बिंदु से समस्या को स्वीकार कर उसका सही इलाज (समाधान) किया जाए, तो हमारा देश एक बेहतर देश बनेगा। [
- व्यापक पारदर्शी प्रणाली: परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए सकारात्मक संवाद के जरिए नए नियमों और नीयत को बदलने की जरूरत है।
- शासन में बदलाव: प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही और नीतियों में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए।
3. लोकतंत्र और शांति की ताकत
वांगचुक ने देश के युवाओं (Gen Z), CJP के सदस्यों और नागरिकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह पूरी जीत शांतिपूर्ण और अहिंसक आंदोलन की वजह से संभव हो पाई है। लोकतंत्र की असली ताकत लाठी या बंदूकों में नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों में है।
4. ‘विजय में विनम्रता’ का संदेश
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद CJP और छात्रों द्वारा मनाए जा रहे जश्न पर प्रतिक्रिया देते हुए वांगचुक ने एक बेहद जरूरी नसीहत भी दी। उन्होंने युवाओं से अपील की कि “विजय में विनम्रता सबसे बड़ी बात है”। जीत की खुशी जरूर मनाएं, लेकिन अत्यंत विनम्र रहकर, जिससे किसी अन्य को ठेस न पहुंचे।
वांगचुक ने अंत में यह भी जोड़ा कि अब देश को भय या बंदिशों के बजाय प्यार-मोहब्बत, संवाद और सत्य के रास्ते पर चलाया जाना चाहिए, ताकि छात्रों और आम नागरिकों को अपनी आवाज उठाने में कभी डर न लगे।

