पर्यावरण और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन खत्म होने के बाद सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बनी सहमति में “शांतिपूर्ण” (Peaceful) शब्द ने ‘लक्ष्मण रेखा’ खींच दी है। सरकार ने वांगचुक की शर्तों को स्वीकार करते हुए प्रदर्शनकारियों को कानूनी कार्रवाई से राहत देने का भरोसा तो दिया है, लेकिन इसमें ‘शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी’ शब्द जोड़ दिया है। इसका सीधा मतलब यह है कि इस शर्त से ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के केवल उन्हीं समर्थकों को सुरक्षा मिलेगी जिन्होंने शांति से आंदोलन किया है, जबकि हिंसा या तोड़फोड़ करने वालों को कोई राहत नहीं मिलेगी।
मुख्य बिंदु और विवाद की वजह
- 26 दिन बाद अनशन खत्म: सोनम वांगचुक ने चिकित्सा प्रवेश परीक्षा (NEET) पेपर लीक मामले में जवाबदेही और सुधारों को लेकर दिल्ली में जारी छात्र आंदोलन के समर्थन में अपना 26 दिनों का अनशन समाप्त कर दिया है। केंद्रीय मंत्रियों की मौजूदगी में उन्होंने जूस पीकर भूख हड़ताल खत्म की।
- ‘शांतिपूर्ण’ शब्द बना लक्ष्मण रेखा: सरकार के साथ हुए ‘कठिन मोलभाव’ के बाद प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मुकदमों को हटाने की शर्त मानी गई। लेकिन सरकार ने स्पष्ट कर दिया कि कानूनी संरक्षण सिर्फ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों को मिलेगा। सोमवार को ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान हुई पुलिस झड़प और बैरिकेड्स तोड़े जाने जैसी हिंसक घटनाओं में शामिल लोगों पर कार्रवाई जारी रह सकती है।
- ‘कॉकरोच’ शब्द का संदर्भ: परीक्षा लीक के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्र गुट ने खुद को व्यंग्यात्मक रूप से ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) नाम दिया है। यह नाम सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की एक टिप्पणी के संदर्भ में रखा गया है जिसमें कथित तौर पर बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच से की गई थी।
- आगे की स्थिति: वांगचुक के अनशन तोड़ने और सरकार के आश्वासन के बावजूद, आंदोलन के आयोजकों (जैसे CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके) का कहना है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं दे देते, तब तक छात्रों का विरोध प्रदर्शन पूरी तरह समाप्त नहीं होगा।
नीट (NEET) पेपर लीक मामले में दिल्ली के जंतर-मंतर पर 26 दिनों से अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सरकार के लिखित आश्वासन के बाद गुरुवार रात (23 जुलाई 2026) को अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी है [संपादित]। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और पीएमओ राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में उन्होंने अस्पताल में जूस पीकर अनशन तोड़ा। हालांकि, सरकार और वांगचुक के बीच हुए इस समझौते में शामिल एक खास शब्द ने आंदोलनकारियों के बीच ‘लक्ष्मण रेखा’ खींच दी है।
इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े मुख्य बिंदु और विवाद इस प्रकार हैं:
1. ‘शांतिपूर्ण’ शब्द बना लक्ष्मण रेखा
वांगचुक ने सरकार के सामने प्रमुख शर्त रखी थी कि आंदोलन कर रहे छात्रों और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के समर्थकों पर कोई कानूनी कार्रवाई (FIR) न की जाए। सरकार ने इस मांग को स्वीकार तो कर लिया, लेकिन इसमें “शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारी” शब्द जोड़ दिया।
इसका सीधा मतलब है कि कानूनी राहत केवल उन्हीं छात्रों को मिलेगी जिन्होंने शांति से आंदोलन किया है। सोमवार को ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान पुलिस के साथ हुई झड़प, तोड़फोड़ या बैरिकेड्स तोड़ने जैसी हिंसक घटनाओं में शामिल लोगों पर कानूनी कार्रवाई जारी रह सकती है। इसी वजह से कहा जा रहा है कि ‘सभी कॉकरोच’ (प्रदर्शनकारी) इस शर्त से खुश नहीं हो सकते।
2. क्या है ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP)?
नीट परीक्षा में हुई गड़बड़ियों और बेरोजगारी के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्र गुट ने व्यंग्यात्मक रूप से खुद को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) नाम दिया है।
- नाम का कारण: यह नाम सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की एक कथित टिप्पणी के विरोध में रखा गया था, जिसमें बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच से की गई थी।
- छात्रों ने इसे एक प्रतीक बना लिया कि ‘कॉकरोच’ एक ऐसा जीव है जो किसी भी खराब सिस्टम में जीवित (Survive) रहने की क्षमता रखता है। सोनम वांगचुक ने भी छात्रों के इस रचनात्मक विरोध को अपना समर्थन देते हुए खुद को ‘मानद कॉकरोच’ (Honorary Cockroach) घोषित किया था।
3. समझौते की अन्य शर्तें
रिपोर्ट के अनुसार, वांगचुक और सरकार के बीच दो दिनों तक चली ‘कठिन मोलभाव’ के बाद इन शर्तों पर लिखित सहमति बनी:
- मुआवजा: नीट पेपर लीक विवाद के बाद तनाव में आकर आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित वित्तीय मुआवजा देने पर सरकार विचार करेगी।
- संसद में बहस: इस मुद्दे पर संसद में जवाबदेही तय करने के लिए एक सार्थक चर्चा आयोजित की जाएगी।
4. आंदोलन अभी पूरी तरह खत्म नहीं
भले ही सोनम वांगचुक ने अपना अनशन वापस ले लिया हो, लेकिन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके का कहना है कि छात्रों का विरोध प्रदर्शन अभी थमा नहीं है। उनकी मुख्य मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है, और जब तक इस्तीफा नहीं होता, तब तक जंतर-मंतर पर उनका शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रहेगा। CJP ने एकजुटता दिखाने के लिए देशव्यापी प्रदर्शनों का भी आह्वान किया है।

