आगरा जलकल विभाग (नगर निगम) के महाप्रबंधक (GM) अरुणेंद्र कुमार राजपूत को भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोपों में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।

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आगरा जलकल विभाग (नगर निगम) के महाप्रबंधक (GM) अरुणेंद्र कुमार राजपूत को भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोपों में तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह बड़ी कार्रवाई प्रमुख सचिव नगर विकास, पी. गुरुप्रसाद द्वारा गुरुवार, 23 अप्रैल 2026 को जारी आदेश के तहत की गई है

मामले के मुख्य विवरण:

  • घोटाले की राशि: विभाग में लगभग 4.30 करोड़ रुपये के घोटाले का अनुमान है।
  • प्रमुख आरोप:
    • पाइपलाइन मरम्मत और नई लाइनें: पाइपलाइन बिछाने और मरम्मत के नाम पर बिना सत्यापन के करोड़ों के फर्जी बिलों का भुगतान किया गया।
    • सामग्री की खरीद: करीब 80 लाख रुपये के स्लूज वाल्व की खरीद में गड़बड़ी और रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रोजेक्ट्स में लगभग 2.5 करोड़ रुपये की अनियमितता मिली है।
    • जांच में बाधा: जीएम राजपूत पर आरोप है कि उन्होंने जांच कमेटी को महत्वपूर्ण फाइलें उपलब्ध नहीं कराईं और साक्ष्य छिपाने की कोशिश की।
  • विभागीय कार्रवाई: निलंबन के साथ ही उन्हें आगरा से हटाकर स्थानीय निकाय निदेशालय, लखनऊ से संबद्ध (attach) कर दिया गया है। उनके खिलाफ अब विस्तृत विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।
  • तात्कालिक प्रभाव: निलंबन से एक दिन पहले ही आगरा के नगर आयुक्त अंकित खंडेलवाल ने उनके वित्तीय अधिकार सीज कर दिए थे और शासन को उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की रिपोर्ट भेजी थी

आगरा जलकल के जीएम अरुणेंद्र राजपूत निलंबित, 4.30 करोड़ के घोटाले पर प्रमुख सचिव का एक्शन.शहर की जलापूर्ति व्यवस्था से जुड़े जलकल विभाग में पाइपलाइन मरम्मत और नई लाइन बिछाने के नाम पर हुए करोड़ों के भ्रष्टाचार पर आखिरकार बड़ी कार्रवाई हुई है। प्रमुख सचिव नगर विकास विभाग ने जलकल विभाग के महाप्रबंधक अरुणेंद्र कुमार राजपूत को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई गुरुवार को जारी आदेश के तहत की गई।

जलकल विभाग में करीब 4.30 करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ है। आरोप है कि पाइपलाइन मरम्मत और नई लाइन बिछाने के नाम पर फर्जी बिल बनाए गए, ठेकेदारों से मिलीभगत की गई और वित्तीय अनियमितताओं को अंजाम दिया गया। इन सबके अलावा जीएम राजपूत पर जांच में सहयोग न करने और दस्तावेज छुपाने के भी गंभीर आरोप लगे हैं।

नगरायुक्त की एक दिन पहले की कार्रवाई :

गौरतलब है कि इस कार्रवाई से एक दिन पहले ही नगरायुक्त ने गंभीर संज्ञान लेते हुए जीएम राजपूत के वित्तीय अधिकार सीज कर दिए थे और तत्काल कार्रवाई के लिए शासन (नगर विकास विभाग) को पत्र लिखा था। नगरायुक्त ने अपने पत्र में विभागीय जांच और प्रशासनिक कार्रवाई की सिफारिश की थी।

शासन का त्वरित एक्शन :

शासन ने नगरायुक्त का पत्र मिलते ही बिना किसी देरी के संज्ञान लिया और अगले ही दिन प्रमुख सचिव नगर विकास ने जीएम अरुणेंद्र राजपूत को निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया। निलंबन आदेश में कहा गया है कि निलंबन अवधि में जीएम का मुख्यालय जलकल कार्यालय आगरा से दूर रहेगा और बिना पूर्व अनुमति के वह शहर नहीं छोड़ सकेंगे।

प्रमुख सचिव नगर विकास ने कहा कि भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि निलंबन पहला कदम है, आगे विभागीय जांच और एफआईआर की भी संभावना है। वहीं नगरायुक्त ने कहा कि आम जनता का पैसा बचाने के लिए आगे और कार्रवाई की जाएगी।

अब इस मामले में विभागीय जांच शुरू होगी। साथ ही पूरे घोटाले का ऑडिट कराया जाएगा और ठेकेदारों व अन्य संलिप्त अधिकारियों से पूछताछ की जाएगी। यदि जांच में साक्ष्य मिलते हैं तो निलंबन के बाद एफआईआर दर्ज करने और सेवा समाप्ति की भी संभावना जताई जा रही है।

आगरा जलकल विभाग में 4.30 करोड़ के इस घोटाले ने प्रशासन की नींद तोड़ दी। नगरायुक्त की सक्रियता और प्रमुख सचिव की सख्ती का नतीजा है कि जीएम अरुणेंद्र राजपूत को मात्र एक दिन के अंदर निलंबित कर दिया गया। अब सबकी निगाहें आगे की जांच और कार्रवाई पर टिकी हैं

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