राजधानी के रेल नेटवर्क में लगेंगे हॉट एक्सल बॉक्स डिटेक्टर, सुरक्षा को मिलेगी मजबूती

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राजधानी में रेल यात्रियों की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए उत्तर रेलवे आधुनिक तकनीक का सहारा लेने जा रहा है। इसके तहत ट्रेनों में तकनीकी खराबियों को समय रहते पहचानने के लिए हॉट एक्सल बॉक्स डिटेक्टर (एचएबीडी) लगाने की योजना है। इससे संभावित रेल हादसों को रोकने में मदद मिलेगी।

इस परियोजना पर करीब 2.71 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। योजना के तहत दिल्ली के विभिन्न रेल मार्गों पर करीब 17 हॉट एक्सल बॉक्स डिटेक्टर लगाए जाएंगे। इसके लिए निविदा प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है और जल्द ही कार्य आवंटित कर दिया जाएगा। अभी रेलवे द्वारा कवच (ट्रेन टक्कर रोकने की प्रणाली), बायो-वैक्यूम टॉयलेट, एलएचबी कोच का विस्तार और स्टेशन पुनर्विकास जैसी योजना संचालित की जा रही है।

तुरंत मिलेगा खतरे का संकेत
हॉट एक्सल बॉक्स डिटेक्टर एक अत्याधुनिक और स्वचालित प्रणाली है, जो चलते हुए ट्रेन के पहियों की धुरी यानी एक्सल के तापमान की निगरानी करती है। यदि किसी डिब्बे या वैगन के एक्सल में असामान्य गर्मी बढ़ती है तो यह सिस्टम तुरंत अलर्ट कर देगा। आमतौर पर एक्सल में अत्यधिक गर्मी होने से बेयरिंग फेल हो सकती है, जिससे पटरी से उतरने जैसे बड़े हादसे हो सकते हैं। यह तकनीक पहले ही खतरे का संकेत देकर रेलवे कर्मचारियों को सतर्क कर देगी, जिससे समय रहते ट्रेन को रोका जा सकेगा और समस्या का समाधान हो सकेगा।


लंबी दूरी की ट्रेनों में होगा खास फायदा
आमतौर पर लंबी दूरी की ट्रेनों में कई बार तकनीकी खराबियों का पता देर से चलता है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। नई एचएबीडी तकनीक इस जोखिम को काफी हद तक कम कर सकती है। यह सिस्टम पूरी तरह कंप्यूटरीकृत होगा और लगातार निगरानी करेगा। इससे न केवल सुरक्षा बढ़ेगी, बल्कि ट्रेनों की समयपालन क्षमता में भी सुधार होगा, क्योंकि तकनीकी खराबियों के कारण होने वाली देरी में कमी आएगी।

पूरे नेटवर्क में हो सकता है विस्तार
इस योजना को भविष्य में पूरे रेलवे नेटवर्क में लागू किया जा सकता है। इससे देशभर में रेल सुरक्षा के स्तर को और अधिक मजबूत किया जा सकेगा। यह निविदा मेक इन इंडिया नीति के तहत जारी की गई है, जिसमें स्थानीय सामग्री और स्वदेशी तकनीक को प्राथमिकता दी जाएगी। इससे देश में तकनीकी आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिलेगा।

6 महीने में पूरा होगा काम, 5 साल तक होगा रखरखाव   
रेलवे ने इस परियोजना को पूरा करने के लिए 6 महीने की समयसीमा तय की है। साथ ही, इन उपकरणों के रखरखाव के लिए 5 साल का व्यापक वार्षिक मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट भी शामिल है। इस पर करीब 1.72 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च होंगे। अधिकारियों का कहना है कि यह योजना केवल उपकरण लगाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उनकी नियमित निगरानी और रखरखाव पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि सिस्टम लंबे समय तक प्रभावी बना रहे।

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