निजी स्कूलों में महंगी किताबें और ड्रेस थोपने के मामले में प्रशासन सख्त हुआ है। जांच में गड़बड़ी मिलने पर 55 स्कूलों को नोटिस जारी करने की तैयारी की जा रही है।
आगरा के निजी स्कूलों में बच्चों को महंगी किताब और ड्रेस देने पर लगाम नहीं लग पा रही है। शासनादेश के बाद भी कई स्कूलों में निजी प्रकाशकों की किताबें अभिभावक और बच्चों को खरीदने पर मजबूर किया जा रहा है। अमर उजाला लगातार इस मामले को उठा रहा है। अब शिक्षा अधिकारी सक्रिय हुए तो स्कूलों में निजी किताबें और ड्रेस के मामलों की पोल खुलने लगी है। बेसिक शिक्षा अधिकारी ने मंगलवार को कुछ स्कूलों में छापा मारा, तो सच्चाई सामने आई। ऐसे 55 स्कूलों को नोटिस भेजने की तैयारी की जा रही है।
एनसीईआरटी की किताबें न लगाने का जवाब स्कूल प्रबंधक नहीं दे सके। बीएसए ने बताया कि एक स्कूल के बाहर बुक एजेंसी संचालित होती मिली। निजी प्रकाशकों की किताबें लगाने पर नोटिस जारी किया जाएगा। यह अभियान लगातार जारी रहेगा। अब तक 55 स्कूलों की सूची तैयार की जा चुकी है, जिनको नोटिस दिया जाएगा। नोटिस का जवाब न देने पर कार्रवाई की जाएगी।

किताबों और स्टेशनरी के बढ़ते दाम:
किताबों, कॉपियों और स्टेशनरी के दामों में पिछले कुछ वर्षों में 40% तक की वृद्धि देखी गई है । कागज और स्याही पर लगने वाले GST और निजी स्कूलों द्वारा हर साल सिलेबस बदलने की मजबूरी अभिभावकों पर ₹10,000 से ₹12,000 तक का अतिरिक्त बोझ डाल रही है
महंगाई और इन्फ्लेशन: शिक्षा के क्षेत्र में महंगाई की दर (Inflation Rate) लगभग 6% मानी जा रही है। HDFC Life के अनुसार, जो प्रोफेशनल कोर्स आज ₹16 लाख में हो रहा है, वह अगले 15 वर्षों में ₹40 लाख तक महँगा हो सकता है ।

प्रशासनिक सख्ती: इस बढ़ती “लूट” को रोकने के लिए कई जगहों पर प्रशासन सख्त हुआ है। आगरा जैसे शहरों में शिक्षा विभाग ने उन 55 स्कूलों को नोटिस जारी किया है जो महंगी किताबें और ड्रेस थोप रहे थे । इसके अलावा, निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिकाएं भी दायर की जा रही हैं ।
शिक्षा ऋण (Education Loans) का बढ़ता बोझ: भारी खर्चों के कारण मध्यमवर्गीय परिवार अब कर्ज लेने पर मजबूर हैं। RBI के आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में भारत का कुल बकाया शिक्षा ऋण ₹1.36 लाख करोड़ तक पहुँच गया है ।
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