भारत की प्रजनन दर में गिरावट, बिहार-यूपी समेत 6 राज्यों को छोड़ सभी State में गिरा ग्राफ

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भारत की कुल प्रजनन दर (Total Fertility Rate – TFR) घटकर 1.9 पर पहुंच गई है, जो कि जनसंख्या स्थिरता के आवश्यक ‘रिप्लेसमेंट लेवल’ (2.1) से भी काफी नीचे है. सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अब देश के सिर्फ 6 राज्यों में फर्टिलिटी रेट रिप्लेसमेंट लेवल (2.1) से ऊपर बचा है, जबकि बाकी सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ग्राफ तेजी से नीचे गिरा है.

इस महत्वपूर्ण जनसांख्यिकीय बदलाव (Demographic Shift) की पूरी स्थिति नीचे दी गई है:

प्रमुख राज्यों की स्थिति (TFR के आंकड़े)

देश के अधिकांश हिस्सों में छोटे परिवारों का चलन बढ़ा है। हालांकि, उत्तर और मध्य भारत के कुछ राज्यों में यह दर अब भी राष्ट्रीय औसत से अधिक बनी हुई है:

  • बिहार (सर्वाधिक): बिहार 2.8 से 3.0 की प्रजनन दर के साथ देश में सबसे आगे है।
  • उत्तर प्रदेश और मेघालय: यूपी (2.4) और मेघालय (2.9) में भी ग्राफ रिप्लेसमेंट स्तर से ऊपर बना हुआ है.
  • अन्य 3 राज्य: झारखंड, मध्य प्रदेश और मणिपुर भी उन 6 राज्यों में शामिल हैं, जहां प्रजनन दर अभी नियंत्रण स्तर से ऊपर है।
  • सिक्किम और गोवा (न्यूनतम): सिक्किम में सबसे कम 1.1 और गोवा में 1.3 फर्टिलिटी रेट दर्ज किया गया है.
  • शहरी बनाम ग्रामीण अंतर: शहरी भारत में टीएफआर घटकर 1.5 हो गया है, जबकि ग्रामीण भारत में यह पहली बार 2.1 के रिप्लेसमेंट स्तर पर आया है.

प्रत्यक्ष तुलना: क्षेत्रीय असमानता

राज्य/क्षेत्रप्रजनन दर (TFR) स्थितिमुख्य विशेषता
बिहार2.8 – 3.0देश में सबसे अधिक प्रजनन दर
उत्तर प्रदेश2.4रिप्लेसमेंट लेवल से अधिक
दक्षिण भारतीय राज्य (केरल, तमिलनाडु)1.7 – 1.8तेजी से बूढ़ी होती आबादी की चुनौती
सिक्किम1.1देश में सबसे कम प्रजनन दर
शहरी भारत1.5अत्यधिक गिरावट, एकल बच्चे का बढ़ता ट्रेंड

प्रजनन दर घटने के मुख्य कारण

  1. महिला साक्षरता और शिक्षा: महिलाओं के शिक्षित होने से विवाह की उम्र बढ़ी है और वे परिवार नियोजन को लेकर अधिक जागरूक हुई हैं।
  2. शहरीकरण और आर्थिक दबाव: शहरों में बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और रहन-सहन का खर्च काफी महंगा हो गया है, जिससे लोग ‘एक या दो बच्चे’ की नीति अपना रहे हैं।
  3. बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं: शिशु मृत्यु दर में कमी आने के कारण अब माता-पिता को अधिक बच्चे पैदा करने की आवश्यकता महसूस नहीं होती।
  4. बढ़ता वर्क प्रेशर और बदलती लाइफस्टाइल: कामकाजी जोड़ों में नौकरी का तनाव और देर से शादी करना भी जैविक कारणों से फर्टिलिटी को प्रभावित कर रहा है।

इसके दूरगामी प्रभाव और चिंताएं

  • वर्कफोर्स की कमी: दक्षिण और पश्चिम भारत के कई राज्यों में आने वाले दशकों में युवाओं (कामकाजी आबादी) की संख्या घटने लगेगी。
  • बुजुर्गों की बढ़ती आबादी: केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों पर वृद्धों की देखभाल और सामाजिक सुरक्षा पेंशन का आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
  • राज्यों के बीच असंतुलन: बिहार और यूपी जैसे राज्यों की आबादी बढ़ती रहेगी, जबकि दक्षिण भारत की आबादी स्थिर या कम होगी, जिससे भविष्य में संसद की सीटों के परिसीमन (Delimitation) और केंद्रीय फंड के बंटवारे को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ सकता है।

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