वर्दी में रील बनाने वाले 8 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई:आगरा में 7 एसआई और एक आरक्षी को किया गया लाइन हाजिर

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आगरा पुलिस कमिश्नरेट ने उत्तर प्रदेश पुलिस की सोशल मीडिया पॉलिसी-2023 का उल्लंघन करने के आरोप में 7 उपनिरीक्षक (SI) और 1 महिला आरक्षी (कांस्टेबल) सहित कुल 8 पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया है. पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार के निर्देश पर मीडिया सेल की जांच के बाद शनिवार को यह बड़ी कार्रवाई की गई

इस अनुशासनात्मक कार्रवाई का विस्तृत विवरण इस प्रकार है:

1. किन पुलिसकर्मियों पर हुई कार्रवाई?

सोशल मीडिया (फेसबुक और इंस्टाग्राम) पर वर्दी पहनकर रील और वीडियो पोस्ट करने के मामले में निम्नलिखित अधिकारियों को चिन्हित किया गया:

  • 5 पुरुष उपनिरीक्षक (SI)
  • 2 महिला उपनिरीक्षक (SI)
  • 1 महिला आरक्षी (कॉन्स्टेबल)

2. क्यों लिया गया यह कड़ा फैसला?

  • सोशल मीडिया पॉलिसी का उल्लंघन: यूपी पुलिस द्वारा फरवरी 2023 में जारी गाइडलाइंस के तहत ड्यूटी के दौरान या सरकारी वर्दी में रील बनाने, हथियारों का प्रदर्शन करने या फिल्मी गानों पर वीडियो बनाने पर सख्त पाबंदी है.
  • ADG लॉ एंड ऑर्डर के सख्त निर्देश: हाल ही में एडीजी लॉ एंड ऑर्डर अमिताभ यश ने आदेश जारी कर कहा था कि रील बनाने से पुलिस की गरिमा और काम प्रभावित होता है, इसलिए उल्लंघन करने वालों पर सीधी विभागीय कार्रवाई की जाए.
  • आंतरिक जांच: आगरा पुलिस की सोशल मीडिया सेल लगातार पुलिसकर्मियों के निजी हैंडल्स की निगरानी कर रही थी, जिसके बाद इन 8 कर्मियों के वीडियो नियमों के विरुद्ध पाए गए.

3. कार्रवाई का क्या असर हुआ?

  • लाइन हाजिर करने के साथ ही सभी आठों पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं.
  • इस सख्त कार्रवाई के बाद आगरा और आसपास के पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है. कई अन्य पुलिसकर्मी कार्रवाई के डर से अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स से पुरानी रील्स और वीडियो डिलीट करने में जुट गए हैं

आगरा पुलिस कमिश्नरेट द्वारा की गई इस बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई के अंतर्गत शामिल थानों और उत्तर प्रदेश पुलिस की सोशल मीडिया पॉलिसी-2023 के कड़े नियमों का पूरा विवरण नीचे दिया गया है:

1. थानों और पुलिसकर्मियों से जुड़ी जानकारी

आगरा पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार के अनुसार, लाइन हाजिर (Line Hazir) किए गए 8 पुलिसकर्मियों में 3 महिला पुलिसकर्मी (2 महिला एसआई और 1 महिला आरक्षी) और 5 पुरुष उपनिरीक्षक (SI) शामिल हैं.

  • गोपनीयता और सुरक्षा: पुलिस विभाग ने अनुशासन और जांच प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए फिलहाल इन पुलिसकर्मियों के नाम और उनके विशिष्ट थानों (Stations) की सूची को आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक नहीं किया है.
  • सोशल मीडिया सेल की भूमिका: पुलिस कमिश्नरेट की मीडिया सेल इन सभी के आधिकारिक और निजी इंस्टाग्राम/फेसबुक हैंडल्स के वीडियो और उनके URL को साक्ष्य (Evidence) के तौर पर सुरक्षित रखकर विस्तृत जांच कर रही है.

2. यूपी पुलिस सोशल मीडिया पॉलिसी-2023 के मुख्य नियम

उत्तर प्रदेश पुलिस ने 8 फरवरी 2023 को महानिदेशक (DGP) कार्यालय के माध्यम से यह नियमावली लागू की थी. हाल ही में मई 2026 में ADG कानून एवं व्यवस्था अमिताभ यश के कड़े आदेश के बाद इस पर ताबड़तोड़ एक्शन शुरू हुआ है. इसके मुख्य नियम निम्नलिखित हैं:

  • वर्दी में वीडियो/रील पर पूर्ण रोक: पुलिसकर्मी ड्यूटी के दौरान या ड्यूटी के बाद भी वर्दी पहनकर किसी भी प्रकार की रील, वीडियो या फिल्मी गानों पर परफॉर्म नहीं कर सकते.
  • परिसर और सरकारी वाहनों का उपयोग प्रतिबंधित: पुलिस थानों, चौकियों, सरकारी कार्यालयों या सरकारी गाड़ियों में व्यक्तिगत वीडियो शूट करना सख्त मना है.
  • हथियारों के प्रदर्शन पर रोक: सरकारी या निजी असलहों (Weapons) के साथ किसी भी प्रकार का टशन दिखाने या रील्स में उनका प्रदर्शन करने पर पूरी तरह पाबंदी है.
  • गोपनीयता का नियम: किसी भी लंबित मामले, जांच, पीड़ित, संदिग्ध या गिरफ्तार व्यक्ति की तस्वीर और संवेदनशील जानकारी सोशल मीडिया पर साझा करना पूरी तरह प्रतिबंधित है.
  • व्यावसायिक लाभ और ब्रांडिंग: पुलिसकर्मी अपने सोशल मीडिया अकाउंट या वीडियो के माध्यम से किसी भी प्रकार की व्यावसायिक कमाई (Monetization), गिफ्ट या किसी उत्पाद का प्रचार नहीं कर सकते.
  • निजी राय का प्रकटीकरण: यदि कोई कर्मी निजी तौर पर सोशल मीडिया का इस्तेमाल करता है, तो उसे स्पष्ट लिखना होगा कि यह उसके व्यक्तिगत विचार हैं, विभाग का इससे कोई लेना-देना नहीं है.
  • राजनीतिक तटस्थता: कोई भी पुलिसकर्मी किसी राजनीतिक दल, अभियान, एजेंडे या विवादित ट्रोलिंग का हिस्सा नहीं बन सकता.

3. कार्रवाई का प्रारूप

नियमों का उल्लंघन करने पर पुलिसकर्मियों को न सिर्फ लाइन हाजिर या सस्पेंड किया जा रहा है, बल्कि उनके खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली के तहत कड़ी विभागीय जांच (Departmental Enquiry) भी चलाई जा रही है.

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