अली लारिजानी के मारे जाने का इसराइल ने किया दावा

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इसराइल के रक्षा मंत्री इसराइल कात्ज़ ने दावा किया है कि ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारिजानी की मौत हो गई है.

रक्षा मंत्री ने अपने बयान में कहा कि उन्हें रात भर चले इसराइली हमलों के बाद ईरान के इस शीर्ष सुरक्षा अधिकारी के मारे जाने की जानकारी दी गई है.

लारिजानी को बीते शुक्रवार को कुछ दिनों पहले तेहरान में क़ुद्स डे मार्च में देखा गया था.

हालांकि, ईरान ने अभी तक पुष्टि नहीं की है कि लारिजानी मारे गए हैं या घायल हुए हैं.

कम से कम दो ईरानी मीडिया संस्थानों का कहना है कि शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अली लारिजानी जल्द ही एक संदेश जारी करेंगे.

अली लारिजानी मई 2008 से मई 2020 तक 12 साल तक ईरान की संसद के स्पीकर रहे

इसराइली सेना के एक अधिकारी ने बीबीसी को पुष्टि की है कि लारिजानी को आईडीएफ़ ने निशाना बनाया था.

तसनीम और मेहर समाचार एजेंसियों की पोस्ट में कहा गया है कि यह संदेश “कुछ ही मिनटों में जारी किया जाएगा.”

इसराइली रक्षा मंत्री ने कहा कि इसराइली सुरक्षा बलों ने एक और शीर्ष सुरक्षा अधिकारी और बसीज कमांडर ग़ुलाम रज़ा सुलेमानी को भी मार गिराया है.

कात्ज़ ने कहा, “प्रधानमंत्री और मैंने आईडीएफ़ को निर्देश दिया है कि वह ईरान के ‘आतंक और दमन’ वाले शासन के नेतृत्व को निशाना बनाना जारी रखे.”

उन्होंने कहा, “अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नेतृत्व में तेज़ी से हो रहे बदलाव की बात की थी. हम उन्हें बताएंगे कि यह बदलाव अब भी जारी है और दो सबसे वरिष्ठ बचे नेताओं की हत्या के बाद और तेज़ हो गया है.”

लारिजानी 2005 से 2007 के बीच ईरान के मुख्य परमाणु वार्ताकार भी रहे थे

कात्ज़ ने इस ऑपरेशन में शामिल इसराइली वायुसेना के पायलटों और खुफिया अधिकारियों की भी सराहना की.

हालांकि, ईरान ने अभी तक यह पुष्टि नहीं की है कि लारिजानी और सुलेमानी की मौत हुई है या नहीं.

अली लारिजानी ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (एएनएससी) के प्रभावशाली सचिव हैं।

उन्हें अगस्त 2025 में राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने इस पद पर नियुक्त किया था. साथ ही उन्हें ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अली ख़ामेनेई का इस काउंसिल में प्रतिनिधि भी बनाया गया था.

ईरानी मीडिया में उन्हें सुप्रीम लीडर के सलाहकार के रूप में भी बताया है. वह मई 2008 से मई 2020 तक 12 साल तक ईरान की संसद के स्पीकर रहे.

हालांकि 2008 से 2012 तक उन्होंने संसद में प्रिंसिपलिस्ट गुट का नेतृत्व किया, लेकिन हाल के वर्षों में उन्हें “मध्यमार्गी कंज़र्वेटिव” के रूप में देखा जाता है.

स्पीकर बनने से पहले, लारिजानी 2005 से 2007 के बीच ईरान के मुख्य परमाणु वार्ताकार भी रहे थे.

उनके भाई सादेग़ लारिजानी भी इस्लामिक रिपब्लिक में एक अहम शख्सियत हैं. वह एक्सपीडिएंसी काउंसिल के प्रमुख हैं, जो एक शीर्ष संस्था है और संसद तथा गार्जियन काउंसिल के बीच विवादों में अंतिम फैसला करती है.

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