दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा बुलाए गए विरोध प्रदर्शन के कारण भारी बवाल और तनाव का माहौल बन गया है। चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के 'विशेष गहन संशोधन' (SIR) में कथित गड़बड़ियों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के साथ यह प्रदर्शन बुलाया गया था।
दिल्ली पुलिस ने इस प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। इसके बावजूद बड़ी संख्या में कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए, जिसके बाद पुलिस ने पूरी दिल्ली को सुरक्षा घेरे में ले लिया है।
बड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं की हिरासत
प्रदर्शन को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने सुबह से ही धरपकड़ शुरू कर दी थी। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को दिल्ली पहुंचते ही एयरपोर्ट से हिरासत में ले लिया गया।
इसके अलावा छात्र कार्यकर्ता नेहा बोरा, अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज और विपक्ष के कई अन्य नेताओं को भी हिरासत में लिया गया है। पुलिस ने अब तक 500 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर डीटीसी बसों के जरिए अस्थायी जेलों और स्टेडियमों में भेजा है।
संसद मार्च पर लाठीचार्ज और झड़पें
जब प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर से संसद भवन की ओर बढ़ने लगे, तो पुलिस ने भारी बैरिकेडिंग कर उन्हें रोकने की कोशिश की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच तीखी झड़प हुई, जिसके बाद पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा।
इस बीच CJP के नए घोषित नेता अजिंक्य शिंदे ने कार्यकर्ताओं से अपील की है कि पुलिस उन्हें जहां भी रोके, वे उसी जगह को 'जंतर-मंतर' मानकर अपना विरोध प्रदर्शन शुरू कर दें।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम और भारी पाबंदियां
सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए दिल्ली और उसके बॉर्डर्स पर 38,000 से अधिक सुरक्षाकर्मी और पैरामिलिट्री फोर्सेस तैनात की गई हैं। जंतर-मंतर पर 10 फीट ऊंचे बैरिकेड्स और आंसू गैस की गाड़ियां लगाई गई हैं।
सख्त सुरक्षा कारणों से दिल्ली आने वाली लगभग 250 ट्रेनें रद्द कर दी गईं और 45 मेट्रो स्टेशनों के एंट्री-एग्जिट गेट बंद रखे गए हैं। इसके साथ ही नई दिल्ली के 4 किलोमीटर के दायरे में इंटरनेट सेवाएं भी प्रभावित हैं। इस कार्रवाई पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है, जबकि सत्ता पक्ष ने इसे अराजकता फैलाने की कोशिश करार दिया है।

