Priyanka Chaturvedi Recalls 1990 Mandal Protests: शिवसेना (उद्धव बालासाहेबे ठाकरे) की फायरब्रांड नेता और राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने 1990 के उस दौर को याद किया है, जिसने देश की राजनीति और सामाजिक ताने-बाने को हमेशा के लिए बदल दिया था. प्रियंका चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर साल 1990 में हुए मंडल कमीशन विरोधी आंदोलन (Anti-Mandal Protests) का एक पुराना वीडियो साझा किया. उन्होंने बताया कि उस समय उनके पति भी इस छात्र आंदोलन का हिस्सा थे और उन पर पुलिसिया कार्रवाई हुई थी
आइए विस्तार से जानते हैं कि प्रियंका चतुर्वेदी ने अपने पोस्ट में क्या लिखा और 1990 का वह कौन सा आंदोलन था जिससे तत्कालीन वीपी सिंह सरकार गिर गई थी.
📌 प्रियंका चतुर्वेदी का सोशल मीडिया पोस्ट: ‘मेरे पति भी हुए थे गिरफ्तार’
सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “1990 में मेरे पति आईआईटी दिल्ली (IIT Delhi) के छात्र थे। वह भी इस छात्र आंदोलन और विरोध प्रदर्शनों में शामिल हुए थे, जिसके बाद उन्हें पुलिस ने हिरासत में ले लिया था।”
उन्होंने उस दौर के शैक्षणिक माहौल की तारीफ करते हुए आगे कहा, “वह एक ऐसा समय था जब देश के बड़े शिक्षण संस्थान छात्रों को उनके मजबूत विचारों और हक के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने से हतोत्साहित (discourage) नहीं करते थे।” प्रियंका ने तत्कालीन सरकार पर निशाना साधते हुए लिखा कि भारी विरोध और छात्रों के आत्मदाह के बावजूद भाजपा (BJP) के बाहरी समर्थन से चल रही वीपी सिंह सरकार अड़ी रही, हालांकि कुछ महीनों बाद ही यह सरकार गिर गई.
🏛️ क्या था 1990 का मंडल आंदोलन जिसने देश को हिला दिया?
7 अगस्त 1990 को देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह (V.P. Singh) ने संसद में ‘मंडल कमीशन’ (Mandal Commission Report) की सिफारिशों को लागू करने का ऐतिहासिक ऐलान किया था.
- 27% ओबीसी आरक्षण: इस रिपोर्ट के तहत सरकारी नौकरियों और केंद्रीय विश्वविद्यालयों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया.
- देशव्यापी छात्र आक्रोश: इस फैसले के विरोध में सामान्य वर्ग (General Category) के छात्र सड़कों पर उतर आए. दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) और आईआईटी (IIT) समेत उत्तर भारत के तमाम शिक्षण संस्थानों में उग्र प्रदर्शन शुरू हो गए.
- 60 छात्रों की मौत और आत्मदाह: आंदोलन ने तब बेहद दर्दनाक रूप ले लिया जब दिल्ली के देशबंधु कॉलेज के छात्र राजीव गोस्वामी सहित कई छात्रों ने सरेआम आत्मदाह (Self-Immolation) का प्रयास किया. प्रियंका चतुर्वेदी के मुताबिक, इस आंदोलन में 60 से अधिक छात्रों की जान गई थी और 200 से ज्यादा ने आत्मदाह की कोशिश की थी.
📉 कैसे गिरी थी वीपी सिंह की सरकार?
मंडल आंदोलन के कारण पैदा हुए देशव्यापी तनाव के बीच भारतीय राजनीति में भारी उथल-पुथल मची. जनता दल की सरकार को बाहर से समर्थन दे रही भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने राम मंदिर आंदोलन और लालकृष्ण आडवाणी की रथयात्रा के दौरान पैदा हुए राजनीतिक हालातों और छात्र आक्रोश को देखते हुए सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया. इसके ठीक बाद नवंबर 1990 में वीपी सिंह की सरकार गिर गई.
बाद में साल 1992 में सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक इंदिरा साहनी मामले में 27% ओबीसी आरक्षण को संवैधानिक रूप से वैध ठहराया, लेकिन साथ ही ‘क्रीमी लेयर’ (Creamy Layer) का नियम भी जोड़ दिया.
🌟 सोशल मीडिया पर छिड़ी ‘योग्यता बनाम आरक्षण’ की बहस
प्रियंका चतुर्वेदी के इस पोस्ट के बाद इंटरनेट पर एक बार फिर से मेरिट (Merit) बनाम आरक्षण (Reservation) को लेकर बहस छिड़ गई है. कई यूजर्स ने सामान्य वर्ग के छात्रों के दर्द को साझा किया, तो कई लोगों ने इसे सामाजिक न्याय (Social Justice) के लिए जरूरी कदम बताया. प्रियंका चतुर्वेदी समय-समय पर अपने यूट्यूब शो और सोशल मीडिया के जरिए युवाओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर बेबाकी से अपनी राय रखती आई हैं.

