मथुरा में बीते 24 घंटे में यमुना का जलस्तर 166.40 मीटर से 16 सेंटीमीटर अधिक दर्ज किया गया है, जोकि खतरे के निशान 166 मीटर से 56 सेंटीमीटर अधिक है। अभी जलस्तर में और बढ़ोत्तरी दर्ज की जा सकती है। इसको लेकर हाई अलर्ट है।
मथुरा-वृंदावन यमुना खादर का भी यही हाल है। दर्जनों कॉलोनियां जलमग्न हो चुकी हैं, तो कई कॉलोनियों में धीरे-धीरे पानी घुस रहा है। बीते दिनों हथिनीकुंड से 3.29 लाख क्यूसेक छोड़े गए पानी की वजह से मथुरा में बाढ़ से हालात बेकाबू होते नजर आ रहे हैं।
वृंदावन में कालिंदी ने लोगों की नींद उड़ा रखी है। यमुना के बढ़ते कदमों से लोग चिंतित हैं। तेज गति से पंख फैलाती यमुना नदी घाटों से निकलकर कॉलोनियों और सड़कों पर नजर आ रही है। कई घाटों को सुरक्षा की दृष्टि से बंद कर दिया। वहां पुलिस बल तैनात कर दिया गया है, ताकि कोई हादसा नहीं हो जाए। अब तक बाढ़ से प्रभावित दर्जनों कॉलोनियों से डेढ़ हजार से अधिक लोगों को नावों के जरिए सुरक्षित स्थानों तक पहुंचा दिया। वहीं पशुओं को सुरक्षित आसरा दिया है।
वृंदावन में यमुना के बढ़ते जलस्तर ने घाटों, कॉलोनियों और संकरी गलियों को जलमग्न कर दिया है। निचले इलाकों में हालात बेहद चिंताजनक हैं। प्रशासन ने कई घाटों पर बैरिकेडिंग की है। पीएसी की तैनाती के साथ राहत एवं बचाव कार्य तेज दिया गया है। पहले तो केसी घाट को बंद किया गया था, लेकिन अब देवराह बाबा घाट को भी कर दिया है। जगन्नाथ घाट और कालिदह मार्ग में सड़कें यमुना के पानी से लबालब हो रही हैं। यहां भी प्रशासन ने बैरियर लगा दिए हैं।
वहीं दो दर्जन कॉलोनियों को बुरा हाल हो रहा है। भक्ति विहार, घनश्याम वाटिका, श्रीजी वाटिका, टटिया स्थान की गौशाला, श्याम नगर, केशव नगर, अक्रूर धाम, मोहिनी नगर आदि क्षेत्रों की हालत खराब हो रहे हैं। पिछले दो दिनों में नावों की मदद से लगभग 1500 लोगों को उनके जलमग्न घरों से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। कई घरों में पानी घुस चुका है, लोग छतों पर शरण लिए हुए हैं। वहीं शहर के भीतर की सड़कों पर नावें चल रही हैं, मानो वृंदावन ‘जल-नगरी’ में बदल गया हो।
बीते 24 घंटे में यमुना का जलस्तर 166.40 मीटर से 16 सेंटीमीटर अधिक दर्ज किया गया है, जोकि खतरे के निशान 166 मीटर से 56 सेंटीमीटर अधिक है। सिंचाई विभाग अपर खंड एक्सईएन नवीन कुमार ने बताया कि बृहस्पतिवार शाम चार बजे हथिनीकुंड से 1.32 लाख क्यूसेक और ओखला से 2.44 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जबकि गोकुल बैराज से 1.11 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया जा रहा है।
डीएम ने कई क्षेत्रों का जाना हाल
इधर, डीएम चंद्रप्रकाश सिंह लगातार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी कर रहे हैं। बृहस्पतिवार को उन्होंने कई क्षेत्रों का हाला जाना। एडीएम एफआर डॉ. पंकज कुमार वर्मा ने बताया कि जिले में कुल 23 गांव बाढ़ प्रभावित हैं। इनमें दो गांव के तो संपर्क मार्ग भी बाधित हैं। वहीं करीब छह गांव ऐसे हैं, जिनकी सिर्फ फसल बर्बाद हुई, लेकिन लोग सुरक्षित हैं।
उन्होंने बताया कि बाढ़ प्रभावितों के लिए कई क्षेत्रों में 39 बाढ़ चौकियां बनाई गईं हैं। प्रत्येक बाढ़ चौकी पर क्षेत्रीय एसडीएम निगरानी कर रहे हैं और लेखपाल एवं नायब तहसीलदार को क्षेत्रों में लगातार भ्रमण करने के निर्देश दिए गए हैं।
विधायक ने किया बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण
विधायक राजेश चौधरी ने बृहस्पतिवार को क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। विधायक ने नाव की जरिये डांगोली, नगला सुदामा, जहांगीरपुर, बेगमपुर में बाढ़ प्रभावित इलाकों का निरीक्षण किया। यमुना किनारे स्थित देवराहा बाबा आश्रम में साधु संतों से मुलाकात।
प्रशासन ने बनाए चार शेल्टर होम
तहसील प्रशासन ने बाढ़ पीड़ितों के लिए क्षेत्र में चार शेल्टर होम बनाए हैं। इनमें विकास, पुलिस, राजस्व एवं मेडिकल की व्यवस्था की गई है। उपजिलाधिकारी वैभव गुप्ता ने बताया कि यमुना के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए गांव शाहपुर, धानौता, गुलालपुर व नगला नंदी में शेल्टर होम बनाए गए हैं।
शाहपुर व धानौता पर नायब तहसीलदार कोसीकलां शंकर पटेल व थानाध्यक्ष अरविंद कुमार और गुलालपुर व नगला नंदी पर नायब तहसीलदार छाता जयंती मिश्रा व थानाध्यक्ष शेरगढ़ प्रदीप कुमार को नोडल अधिकारी बनाया है। शेल्टर होम पर खानपान, पानी के टैंकर, सफाई की व्यवस्था के साथ लेखपाल, अमीन, डॉक्टर तैनात किए हैं।
रावल में घरों तक पहुंचा पानी
यमुना का जलस्तर बढ़ने से गांव बहटा बांगर बाढ़ की चपेट में आ गया है। प्रभावित लोगों को प्रशासन ने शिफ्ट कराया है। जिलाधिकारी सीपी सिंह ने बताया कि बाढ़ से प्रभावित 43 लोगों को नगला नंदी के प्राथमिक विद्यालय में शिफ्ट कराया है। इनमें 25 महिलाएं, 16 पुरुष व 2 बच्चे हैं। प्रभावित लोगों के खाने-पीने की व्यवस्था की गई। इस दौरान एसडीएम वैभव गुप्ता, सीओ भूषण वर्मा, तहसीलदार सचिन पवार, नायब तहसीलदार जयंती मिश्रा, एसएचओ प्रदीप कुमार आदि मौजूद रहे।
महावन तहसील क्षेत्र में यमुना स्थित राधारानी मंदिर के पास बना लाडली कुंड बाढ़ के पानी से भर गया है। यहां बने पार्क भी पानी से लबालब हैं। ग्रामीण नाहर सिंह ने बताया गया यमुना के पानी से खेतों में खड़ी धान, बाजरा, ज्वार की फसल डूब गई हैं। पशुओं के लिए हरे चारे की दिक्कत हो रही है। पानी बढ़ते हुए निचले आबादी वाले इलाकों में घरों में घुस गया है। प्रशासन की तरफ से अभी कोई अधिकारी नहीं पहुंचा है।
शेरगढ़ में बाढ़ पीड़ितों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा
बाढ़ प्रभावित गांव बाबूगढ़, नगला सपेरा, धीमरी गुलालपुर, सपेरा नगला, चमन गढ़ी, ओवा बहटा आदि गांवों के लोग घरों से सुरक्षित स्थान पर चले गए हैं। छाता एसडीएम वैभव गुप्ता और शेरगढ़ थाना प्रभारी प्रदीप कुमार ने बाढ़ से घिरे घरों को खाली कराया और पीड़ितों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाकर उनके भोजन आदि की व्यवस्था की। बृहस्पतिवार दोपहर जिला प्रशासन ने बढ़ते जल स्तर को देखते हुए क्षेत्र में पीएसी तैनात की है। स्टीमर में बैठकर अधिकारी क्षेत्र में निगाह बनाए हुए हैं। एसडीएम वैभव गुप्ता ने बताया कि अक्षयपात्र के माध्यम से पीड़ितों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।
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