बूंद-बूंद को तरसे लोग: बांसवाड़ा में पानी की किल्लत पर फूटा गुस्सा, बेबस ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी

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बांसवाड़ा जिले के ग्रामीण इलाकों में भयंकर पेयजल संकट के कारण स्थानीय निवासियों का गुस्सा फूट पड़ा है। लंबे समय से पानी की समस्या से जूझ रहे बेबस ग्रामीणों ने अब प्रशासन के खिलाफ उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है

संकट के मुख्य कारण और ग्रामीणों की मांगें

  • सूखे जलस्रोत: भीषण गर्मी के कारण क्षेत्र के अधिकांश हैंडपंप, कुएं और पारंपरिक जलस्रोत पूरी तरह सूख चुके हैं।
  • सप्लाई में अनियमितता: जलदाय विभाग (PHED) द्वारा की जा रही पानी की सप्लाई बेहद अनियमित है, जिससे कई दिनों तक गांवों में पानी नहीं पहुंच रहा है।
  • दूरी की मार: ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए चिलचिलाती धूप में कई किलोमीटर दूर भटकना पड़ रहा है।
  • प्रशासन को अल्टीमेटम: ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। यदि अगले कुछ दिनों में टैंकरों के जरिए नियमित जलापूर्ति शुरू नहीं की गई, तो वे सड़कों पर उतरकर चक्का जाम करेंगे।

1. भीमसौर गांव में अनोखा प्रदर्शन: बर्तनों की ‘शवयात्रा’

  • 2 महीने से ठप सप्लाई: गदियो प्रधान और सरपंच के नेतृत्व में भीमसौर पंचायत के ग्रामीणों ने पानी की सप्लाई बंद होने पर एक अनोखा विरोध प्रदर्शन किया है।
  • सांकेतिक अंतिम यात्रा: महिलाओं और ग्रामीणों ने खाली मटकों, बाल्टियों और बर्तनों को एक चारपाई (खाट) पर रखकर “पानी की अंतिम यात्रा” निकाली और जलदाय विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
  • करोड़ों की योजना विफल: ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 2022-23 में मछेरा बांध से जलापूर्ति के लिए लगभग ₹1.99 करोड़ की लागत से पेयजल योजना स्वीकृत हुई थी, लेकिन नदी में बने कुएं सूख चुके हैं और पूरी योजना फेल हो गई है।

2. ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों से अन्य प्रमुख अपडेट्स

  • 82 गांवों में हाहाकार: बड़ोदिया सहित आसपास के 82 गांवों में पिछले 7 दिनों से पानी की सप्लाई पूरी तरह ठप पड़ी है, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
  • दूषित पानी की मार: बांसवाड़ा शहर के कई वार्डों (जैसे माही सरोवर नगर) में दबाव बेहद कम है। जिला कांग्रेस ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर आरोप लगाया कि जनता को पीला और बदबूदार पानी मिल रहा है, जिससे लोग बीमार हो रहे हैं।
  • लसाड़ा गांव की स्थिति: गनोड़ा क्षेत्र के लसाड़ा गांव में स्कूल परिसर और तालाब किनारे लगे हैंडपंप लंबे समय से खराब हैं, जिससे स्कूली बच्चों और मवेशियों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है।
  • पानी के कैंपर महंगे: भीषण गर्मी के बीच सज्जनगढ़, कुशलगढ़ और बागीदौरा क्षेत्रों में निजी वाटर कैंपर संचालकों ने कीमतें ₹20 से बढ़ाकर ₹30 प्रति कैंपर कर दी हैं, जिससे आम जनता की जेब पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है।

3. जलदाय विभाग (PHED) और प्रशासन का एक्शन

जल संकट के बढ़ते दबाव के बीच जलदाय विभाग की 14 विशेष टीमों ने जिलेभर में आकस्मिक चेकिंग और मरम्मत अभियान चलाया है:

  • हैंडपंप मरम्मत: ग्रामीण इलाकों में बंद पड़े 72 खराब हैंडपंपों को तुरंत दुरुस्त कर चालू किया गया है।
  • पानी की बर्बादी पर रोक: मुख्य लाइनों के 8 बड़े लीकेज ठीक किए गए और पेयजल लाइनों से सीधे पानी खींचने वाले 3 अवैध कनेक्शन काटे गए हैं।
  • अधिकारियों का दावा: भीमसौर मामले पर विभाग के अधिशासी अभियंता (XEn) जे.के. चरण ने आश्वासन दिया है कि एनिकट और वेल पॉइंट की तकनीकी खराबी को दूर कर एक-दो दिनों में सप्लाई सामान्य कर दी जाएगी।

4. राहत और जल संरक्षण की पहल

  • ‘उत्सव गंगा’ प्याऊ: तपती गर्मी को देखते हुए पुलिस प्रशासन और स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाओं ने उदयपुर रोड व मीरा पार्क सिविल लाइंस पर राहगीरों के लिए ठंडे पानी के प्याऊ शुरू किए हैं।
  • वंदे गंगा अभियान: जिला कलेक्टर की उपस्थिति में जिले की बोरी ग्राम पंचायत में “वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान-2026” के तहत 134 जल संरक्षण संरचनाओं का लोकार्पण किया गया है ताकि भविष्य में वर्षा जल संचयन को बढ़ावा दिया जा सके।

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