आगरा में प्रीपेड स्मार्ट मीटर के विरोध में स्थिति गंभीर हो गई है, जहाँ उपभोक्ताओं के गुस्से के कारण 8 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के स्मार्ट मीटर ‘कबाड़’ में बदल गए हैं। आगरा के अकोला और कागारौल जैसे क्षेत्रों में ग्रामीणों ने बड़ी संख्या में अपने घरों से मीटर उखाड़ दिए और उन्हें स्थानीय बिजली घरों के सामने फेंक कर अपना विरोध जताया।
इस विवाद के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- नुकसान का आकलन: रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 1000 से 1500 स्मार्ट मीटर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिससे दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (DVVNL) को करोड़ों का फटका लगा है।
- उपभोक्ताओं की शिकायतें: लोगों का आरोप है कि ये मीटर बहुत तेज़ चलते हैं, जिससे बिजली का बिल दो से तीन गुना तक बढ़ गया है। साथ ही, रिचार्ज खत्म होते ही बिना सूचना के बिजली कटने और पैसे जमा करने के बावजूद कनेक्शन बहाल न होने जैसी तकनीकी खामियों से उपभोक्ता परेशान हैं。
- कानूनी कार्रवाई: हिंसा और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने के आरोप में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। अकोला में हुई तोड़फोड़ के मामले में पुलिस ने 16 लोगों के खिलाफ नामजद और लगभग 500-600 अज्ञात लोगों पर FIR दर्ज की है।
- सरकार का बड़ा फैसला: बढ़ते विरोध को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने स्मार्ट प्रीपेड सिस्टम को बंद करने का आदेश दिया है। अब सभी स्मार्ट मीटर पोस्टपेड की तरह काम करेंगे, जिससे उपभोक्ताओं को महीने के अंत में बिल मिलेगा और रिचार्ज की अनिवार्यता खत्म हो जाएगी
जिनके यहां से उखड़े मीटर, वहां कैसे लगेंगे
जिन उपभोक्ताओं ने मीटर उखाड़ कर सड़क पर फेंक दिए। अब उनके यहां पर कब मीटर लगेंगे। कौन लगाएगा। यह अभी तक निश्चित नहीं हो सका है। बिना मीटर के ही बिजली जल रही है। इस संबंध में मुख्य अभियंता डीवीवीएनएल कपिल सिंधवानी ने बताया कि अभी इस संबंध में कोई निर्णय नहीं हो सका है।
आठ हजार है कीमत
स्मार्ट मीटर की कीमत लगभग आठ हजार है। जिसे पुराने मीटरों के स्थान पर निश्शुल्क लगाया जा रहा है।
वर्तमान में, आगरा सहित पूरे यूपी में नए स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगा दी गई है और शिकायतों की जांच के लिए कमेटी गठित की गई है।

