नैनीताल: खुरपाताल न्याय पंचायत के घटगढ़ गांव में शराब की दुकान खुलने के विरोध में आज मातृ शक्ति का साथ दिया।

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नैनीताल के खुरपाताल न्याय पंचायत के घटगढ़ गांव में  शराब की दुकान खोलने को लेकर ग्रामीणों का विरोध नहीं थम रहा।

खुरपाताल न्याय पंचायत के घटगढ़ गांव में शराब की दुकान के खिलाफ महिलाओं (मातृ शक्ति) का यह कदम सामाजिक जागरूकता की एक बड़ी मिसाल है। अक्सर ग्रामीण क्षेत्रों में शराब की दुकानों के कारण पारिवारिक शांति और आर्थिक स्थिति पर बुरा असर पड़ता है, जिसके विरोध में महिलाएं सबसे आगे रहती हैं।
आपके इस प्रयास और समर्थन से जुड़े कुछ मुख्य बिंदु सराहनीय हैं:
  • एकजुटता: मातृ शक्ति का साथ देना यह दर्शाता है कि ग्रामीण समाज अपनी आने वाली पीढ़ी और गांव के माहौल को लेकर गंभीर है।
  • सामाजिक प्रभाव: ऐसे आंदोलनों से न केवल प्रशासन पर दबाव बनता है, बल्कि अन्य गांवों के लिए भी यह एक प्रेरणा बनता है।
  • संवैधानिक अधिकार: शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन ग्रामीणों का अधिकार है, खासकर जब मामला उनके रहन-सहन और सुरक्षा से जुड़ा हो।
  • खुरपाताल न्याय पंचायत के घटगढ़ क्षेत्र में शराब की दुकान के विरोध को लेकर प्रशासन की चुप्पी वाकई चिंताजनक है। ताज़ा जानकारी के अनुसार, इस मामले में प्रशासन का अब तक का रुख कुछ इस प्रकार रहा है:

    • जनभावनाओं की अनदेखी: ग्रामीणों का आरोप है कि 19 मार्च 2026 को प्रस्ताव प्रकाशित होने के बाद जनप्रतिनिधियों ने लिखित विरोध दर्ज कराया था, फिर भी संबंधित विभाग ने टेंडर प्रक्रिया जारी रखी।
    • अधिकारियों की अनुपस्थिति:एक  रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शन के कई दिनों बाद भी न तो जिला मजिस्ट्रेट और न ही कोई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे हैं।
    • आयुक्त का आश्वासन: प्रदर्शन के दौरान जब महिलाएं आयुक्त दीपक रावत से मिलीं, तो उन्होंने रिपोर्ट मिलने की बात कही और आबकारी विभाग से चर्चा कर जनभावनाओं के अनुरूप कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
    • ज्ञापन पर कार्रवाई का अभाव: ग्रामीणों ने 23 मार्च को ही एडीएम (ADM) को ज्ञापन सौंपा था, लेकिन अभी तक उस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
    • यह जानकर बहुत प्रेरणा मिलती है कि खुरपाताल न्याय पंचायत के घटगढ़ गांव में मातृ शक्ति (महिलाओं) ने शराब की दुकान खुलने के विरोध में आवाज उठाई है और आपने इस संघर्ष में उनका साथ दिया।
      उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में, विशेषकर कुमाऊं के इन अंचलों में, महिलाओं का यह विरोध केवल एक दुकान के खिलाफ नहीं, बल्कि अपने घर-परिवार और आने वाली पीढ़ी को बचाने की एक बड़ी लड़ाई है। अक्सर देखा गया है कि गांवों में शराब की आसान उपलब्धता से न केवल आर्थिक तंगी बढ़ती है, बल्कि घरेलू हिंसा और युवाओं में नशे की लत जैसी गंभीर समस्याएं भी पैदा होती हैं।
      घटगढ़ की महिलाओं ने जिस तरह एकजुट होकर इस निर्माण या दुकान का विरोध किया है, वह ‘नशा मुक्त पहाड़’ की संकल्पना को साकार करने की दिशा में एक साहसी कदम है। जब समाज की ‘मातृ शक्ति’ इस तरह सड़कों पर उतरती है, तो यह शासन और प्रशासन के लिए एक स्पष्ट संदेश होता है कि जनहित से ऊपर कोई नीति नहीं हो सकती।
      इतिहास गवाह है कि उत्तराखंड में चिपको आंदोलन से लेकर शराब विरोधी आंदोलनों तक, महिलाओं की भागीदारी ने ही बड़े बदलाव लाए हैं। घटगढ़ का यह विरोध प्रदर्शन भी उसी गौरवशाली परंपरा का हिस्सा है।
    ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि टेंडर रद्द नहीं किया गया और प्रशासन ने जल्द सुध नहीं ली, तो वे उग्र आंदोलन और आत्मदाह जैसे कदम उठाने को मजबूर होंगे।
                ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि टेंडर रद्द नहीं किया गया और प्रशासन ने जल्द सुध नहीं ली, तो वे उग्र आंदोलन और आत्मदाह जैसे कदम उठाने को मजबूर होंगे।
फिलहाल ग्रामीण क्षेत्र में धरने प्रदर्शन में जुटे हुए है। धरने प्रदर्शन में न्यायपंचायत के समस्त पूर्व व वर्तमान ग्राम प्रधानों बीडीसी मेंबर का जबरदस्त समर्थन मिला श्रीमती सोनी बिष्ट चेतना समूह से श्रीमती सरिता बिष्ट गुंजन बिष्ट, प्रभा बुद्धलकोटी जागृति समूह से श्रीमती नीमा खोलिया कांति बिष्ट श्रीमती राधा बिष्ट, उमा देवी, हंसी बिष्ट,ग्राम प्रधान नलनी श्री गोविंद सिंह अधिकारी जी बीटीसी मेंबर श्री सूरज अधिकारी ग्राम प्रधान जलालगांव कुशाल सिंह लिस्ट क्षेत्र पंचायत मंगोली मुकेश मेहरा सामाजिक कार्यकर्ता योगेश सिंह बिष्ट, पूर्व प्रधान नलनी कुंदन अधिकारी, कृपाल अधिकारी राजू अधिकारी
हर्षित बिष्ट, बीना अधिकारी, जितेंद्र बिष्ट पूर्व बीटीसी मेंबर बाकी समस्त ग्ग्राम पंचायत वासी समेत तमाम ग्रामीण जुटे रहे। 

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