देश की सियासत में एक बार फिर प्रधानमंत्री को सीधे तौर पर बहस की चुनौती देने का मामला गरमा गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के ज्वलंत मुद्दों पर आमने-सामने की खुली बहस करने की नई चुनौती दी है। राहुल गांधी का कहना है कि प्रधानमंत्री को देश की जनता के सामने अर्थव्यवस्था, बेरोजगारी और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे गंभीर विषयों पर उनके सवालों का जवाब देना चाहिए।
राहुल गांधी ने अपनी इस मांग को दोहराते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शीर्ष नेताओं के बीच वैचारिक और नीतिगत बहस होनी चाहिए ताकि जनता सच जान सके। हालांकि, इस चुनौती के सामने आने के तुरंत बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की ओर से केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कड़ा और तीखा पलटवार किया है।
देश के सामने खुली बहस क्यों जरूरी: राहुल गांधी
राहुल गांधी ने एक बार फिर जोर देकर कहा कि वे किसी भी मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ सीधी बहस के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री गंभीर मुद्दों पर सीधे सवालों से बचते हैं और संसद से लेकर सार्वजनिक मंचों तक केवल एकतरफा संवाद करते हैं।
कांग्रेस नेता ने कहा कि यदि प्रधानमंत्री को अपनी सरकार की नीतियों, रोजगार के दावों और आर्थिक विकास पर पूरा भरोसा है, तो उन्हें विपक्ष के साथ सार्वजनिक रूप से बैठकर इन दावों की सत्यता साबित करनी चाहिए। उन्होंने जनता के बीच इस खुली बहस को लोकतंत्र की मजबूती के लिए बेहद जरूरी बताया।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का तीखा पलटवार
राहुल गांधी की इस चुनौती पर पलटवार करते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस की नीतियों और उनके दावों को पूरी तरह से खोखला बताया। वित्त मंत्री ने पलटवार करते हुए कहा कि जो लोग संसद के भीतर बहस के दौरान गंभीर चर्चा छोड़कर वॉकआउट कर जाते हैं, वे बाहर खुली बहस की बात कर रहे हैं।
निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस शासनकाल की आर्थिक नीतियों पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले विपक्ष को देश के विकास से जुड़े आंकड़ों और तथ्यों का सही अध्ययन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश तेजी से आगे बढ़ रहा है और सरकार हर मंच पर जनता को जवाब देने के लिए हमेशा तैयार रहती है, लेकिन विपक्ष केवल राजनीतिक सुर्खियां बटोरने के लिए इस तरह के हथकंडे अपना रहा है।


