अमेरिकी राजनीति और चुनावी मैदान से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक बेहद चौंकाने वाली और बुरी खबर सामने आ रही है। हाल ही में संपन्न हुए अमेरिकी चुनावों में डोनाल्ड ट्रंप को एक बड़ा और करारा राजनीतिक झटका लगा है। ट्रंप ने जिन तीन उम्मीदवारों को अपना सबसे खास और चहेता बताते हुए उनके लिए पूरी ताकत झोंकी थी, वे तीनों ही चुनाव हार गए हैं।
इस हार को ट्रंप की व्यक्तिगत लोकप्रियता और उनके राजनीतिक दबदबे पर एक बड़े प्रहार के रूप में देखा जा रहा है। सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि रिपब्लिकन पार्टी और ट्रंप के मजबूत गढ़ माने जाने वाले इलाकों में भी इन उम्मीदवारों को मुंह की खानी पड़ी है।
अपने ही गढ़ में ढेर हुए ट्रंप के सिपहसालार
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि जिन सीटों पर डोनाल्ड ट्रंप ने खुद प्रचार किया और जिन्हें उनका पारंपरिक गढ़ माना जाता है, वहां रिपब्लिकन उम्मीदवारों की जीत पक्की होगी। हालांकि, चुनावी नतीजे इसके बिल्कुल उलट रहे। जनता ने ट्रंप के नाम और उनके आक्रामक प्रचार को दरकिनार करते हुए विपक्षी उम्मीदवारों पर अपना भरोसा जताया।
इस करारी शिकस्त ने साबित कर दिया है कि ट्रंप के गढ़ में भी अब उनकी लहर वैसी नहीं रही जैसी पहले देखी जाती थी। स्थानीय मुद्दों और मतदाताओं की नाराजगी के आगे ट्रंप का जादुई प्रभाव काम नहीं आ सका।
पार्टी के भीतर और बाहर उठने लगे सवाल
इन तीनों पसंदीदा उम्मीदवारों की हार के बाद अब खुद रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी सुगबुगाहट तेज हो गई है। पार्टी के कुछ गुटों का मानना है कि केवल ट्रंप के चहेते होने के आधार पर टिकट देने का खामियाजा भुगतना पड़ा है।
वहीं दूसरी ओर, विपक्षी दल इस जीत को अमेरिकी जनता द्वारा ट्रंप की नीतियों और उनकी राजनीतिक शैली को खारिज करने के रूप में पेश कर रहे हैं। इस चुनावी नतीजे के बाद अब डोनाल्ड ट्रंप को आगामी राजनीतिक रणनीतियों को लेकर नए सिरे से विचार करना होगा।


