आगरा में हॉस्टल के कमरे में मिला मेडिकल छात्रा का शव, नींद की गोलियों का ओवरडोज लेने की आशंका

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आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज (SNMC) में एक दुखद घटना सामने आई है, जहाँ एक मेडिकल छात्रा का शव उसके हॉस्टल के कमरे में मिला है। पुलिस और कॉलेज प्रशासन इस मामले की गहराई से जांच कर रहे हैं।

घटना का विवरण

  • छात्रा की पहचान: मृतक छात्रा एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही थी और लेडी लायल हॉस्टल में रह रही थी।
  • जांच की स्थिति: पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मौत के सटीक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चलेगा।
  • पुलिस कार्रवाई: अधिकारी छात्रा के दोस्तों, सहपाठियों और परिवार से पूछताछ कर रहे हैं। साथ ही, उसके मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की भी जांच की जा रही है ताकि घटना से जुड़ी परिस्थितियों को समझा जा सके।
  • एमडी छात्रा डॉ. वर्तिका सिंह हॉस्टल में मृत मिलीं।
  • नींद की गोलियों के ओवरडोज से मौत की आशंका।
  • पहले भी कर चुकी थीं आत्महत्या का प्रयास।

इस घटना ने शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और उन पर बढ़ते दबाव को लेकर एक गंभीर विमर्श खड़ा कर दिया है। कॉलेज प्रशासन ने छात्रा के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

डॉ. वर्तिका ने इस वर्ष फरवरी में चिकित्सालय के एक सीनियर रेजीडेंट पर परेशान करने का आरोप लगाया था। संस्थान की प्रबंधन कमेटी द्वारा जांच के बाद सीनियर रेजीडेंट को क्लीन चिट दे दी गई थी। जिसके बाद से डॉक्टर के तनाव में होने की बात कही जा रही थी।

लखनऊ निवासी डॉ. वर्तिका ने एमबीबीएस करने के बाद इस वर्ष 22 फरवरी को मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सालय में एमडी में प्रवेश लिया था। वह परिसर में ही बने हास्टल के प्रथम तल पर रहती थीं। रविवार को सुबह 11 बजे मां ने डॉ. वर्तिका को कई बार कॉल की, लेकिन उन्होंने रिसीव नहीं किया।

जिस पर शाम करीब छह बजे मां ने डॉ. वर्तिका के साथ पढ़ने वाले डॉ. सिद्धार्थ ठाकुर और डॉ. सना रब्बानी को कॉल कर वर्तिका के कमरे पर जाकर बात कराने को कहा। दोनों साथी डॉ. वर्तिका के कमरे पर गए तो वह अंदर से बंद था। जिसके बाद वार्डन को बुलाकर कमरे का दरवाजा तोड़ा गया तो डॉ. वर्तिका अपने बेड पर पड़ी थीं।

साथी चिकित्सक उन्हें एसएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी लेकर गए। वहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
घटना की जानकारी होने पर पुलिस भी पहुंच गई। देर रात फील्ड यूनिट को घटनास्थल पर बुलाया गया। पुलिस की प्रारंभिक छानबीन में सामने आया है कि डॉ. वर्तिका मानसिक रूप से परेशान चल रही थीं।

उन्होंने 27 मार्च को भी आत्महत्या का प्रयास किया। जिस पर संस्थान द्वारा उन्हें अपनी निगरानी में रखा गया था। इसकी जानकारी स्वजन को देने पर वह डॉ. वर्तिका को अपने साथ लखनऊ लेकर चले गए थे। वह 21 अप्रैल को घर से लौटी थीं। संस्थान के निदेशक डॉ. दिनेश राठौर ने पुलिस को बताया कि फरवरी में छात्रा ने सीनियर रेजीडेंट डॉ. सार्थक पर अपने साथ अभद्रता करने का आरोप लगाया था।

डॉ. वर्तिका की शिकायत पर तीन डॉक्टरों की कमेटी ने पूरे मामले की जांच की थी। कमेटी ने बयान दर्ज किए थे, जिसमें अभद्रता के आरोप साबित नहीं हुए थे। तब डॉ. वर्तिका ने 27 मार्च को भी आत्महत्या का प्रयास किया था।

उन्होंने नींद की गोलियों की ओवरडोज ले ली थी। उनका मनोचिकित्सक से भी उपचार चल रहा था। इंस्पेक्टर हरीपर्वत नीरज कुमार शर्मा ने बताया कि डॉ. वर्तिका के स्वजन को सूचना दे दी है। शव की पोस्टमार्टम रिपोर्ट और स्वजन की तहरीर के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

मदद के लिए:
अगर आप या आपके जानने वाले किसी भी तरह के मानसिक तनाव या कठिन दौर से गुजर रहे हैं, तो कृपया इन हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क करें:

  • Vandrevala Foundation: +91-9999666555
  • Aasra: +91-9820466726 (24×7 हेल्पलाइन)
  • Kiran (National Mental Health Helpline): 1800-599-0019

किसी भी संकट की स्थिति में विशेषज्ञों से बात करना और मदद मांगना एक महत्वपूर्ण कदम है।

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