पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का संसद परिसर में भाजपा और एनडीए सांसदों द्वारा जोरदार स्वागत किए जाने पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच एक तीखा राजनीतिक विवाद छिड़ गया है। नीट (NEET) परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक को लेकर देशव्यापी छात्र विरोध प्रदर्शनों के बाद प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफे के दो दिन बाद जब वे संसद पहुंचे, तो सत्ताधारी गठबंधन के सांसदों ने “धर्मेंद्र प्रधान जिंदाबाद” के नारे लगाए और उन्हें पारंपरिक टोपी व शॉल पहनाकर सम्मानित किया। इस स्वागत को लेकर विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला है।
विपक्ष का आरोप और प्रतिक्रिया
- भविष्य की बर्बादी का जश्न: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस स्वागत को “लाखों बच्चों के भविष्य की बर्बादी का जश्न” करार दिया है।
- भ्रष्टाचार का प्रतीक: उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर लिखा कि धर्मेंद्र प्रधान भ्रष्टाचार और देश की बर्बाद शिक्षा व्यवस्था के प्रतीक बने रहेंगे।
- दबाव में इस्तीफा: विपक्ष का कहना है कि प्रधान का इस्तीफा किसी नैतिकता के कारण नहीं, बल्कि सड़कों पर उतरे युवाओं के आक्रोश और डर की वजह से आया है।
- संसद में नारेबाजी: विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में “चोर, चोर, कागज चोर” के नारे लगाकर इस सम्मान समारोह का कड़ा विरोध किया।
सत्ता पक्ष और समर्थकों का रुख
- एकजुटता का संदेश: भाजपा और एनडीए सांसदों ने इस स्वागत के जरिए अपने वरिष्ठ नेता के प्रति एकजुटता प्रदर्शित की है।
- ओडिशा का गौरव: ओडिशा सरकार के मंत्री बिभूति जेना ने इस स्वागत का बचाव करते हुए कहा कि धर्मेंद्र प्रधान जैसे नेता ओडिशा की शान हैं।
- सराहनीय कार्य: सत्ता पक्ष के समर्थकों का तर्क है कि उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी शिक्षा मंत्रालय में सराहनीय कार्य किया है।
पृष्ठभूमि और छात्रों का विरोध
यह पूरा विवाद देश में पिछले कुछ हफ्तों से चल रहे गंभीर परीक्षा संकट से जुड़ा हुआ है:
- छात्रों का प्रदर्शन: ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) और कई अन्य छात्र संगठनों के नेतृत्व में हजारों छात्र पेपर लीक के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर और अन्य जगहों पर उग्र प्रदर्शन कर रहे थे।
- गंभीर आरोप: विपक्ष और छात्र आंदोलनों ने आरोप लगाया कि परीक्षा प्रणालियों की विफलता और मानसिक तनाव के कारण कई छात्रों की जान गई।
- इस्तीफे पर जश्न: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर आते ही प्रदर्शनकारी छात्रों ने इसे अपने आंदोलन की एक बड़ी जीत बताते हुए जश्न मनाया था

