प्रशासन के विश्वासघात के खिलाफ घटगढ़ में फूटा जनआक्रोश: शराब भट्टी के विरोध में चौथे दिन भी धरना जारी
नैनीताल/खुरपाताल न्याय पंचायत खुरपाताल के घटगढ़ क्षेत्र में प्रस्तावित शराब की दुकान के खिलाफ ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। मातृशक्ति और युवाशक्ति के नेतृत्व में चल रहे अनिश्चितकालीन धरने का आज चौथा दिन रहा। कड़ाके की ठंड और अपनी आजीविका को दांव पर लगाकर ग्रामीण दिन-रात धरना स्थल पर डटे हुए हैं, लेकिन ताज्जुब की बात यह है कि चार दिन बीत जाने के बाद भी शासन, प्रशासन या आबकारी विभाग का कोई भी अधिकारी सुध लेने नहीं पहुँचा है।
विश्वासघात का आरोप: लिखित आश्वासन के बाद रातों-रात खुदाई आंदोलनकारियों का आरोप है कि प्रशासन ने उनके साथ छल किया है। इससे पूर्व जब बजून और मंगोली में दुकानें प्रस्तावित थीं, तब ग्रामीणों ने 9 दिनों तक अनवरत धरना और भूख हड़ताल की थी। दबाव में आकर आबकारी विभाग ने लिखित आश्वासन दिया था कि पूरी न्याय पंचायत खुरपाताल में कहीं भी शराब की दुकान नहीं खुलेगी।

“प्रशासन की कथनी और करनी में जमीन-आसमान का अंतर है:- लिखित आश्वासन के महज तीन दिन बाद ही घटगढ़ में रातों-रात जेसीबी चलाकर दुकान के लिए खुदाई शुरू कर दी गई।
यह लोकतंत्र का मजाक है:- स्थानीय आंदोलनकारी काम-धंधा छोड़ सड़कों पर उतरीं माताएं-बहनें धरना प्रदर्शन में सबसे आगे क्षेत्र की महिलाएं हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार को पहाड़ के ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अच्छे अवसर प्रदान करने चाहिए, लेकिन सरकार यहाँ ‘मधुशालाएं’ खोलकर युवाओं का भविष्य और घरों की शांति भंग करना चाहती है।उग्र आंदोलन और आत्मदाह की चेतावनी ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही इस शराब की दुकान के प्रस्ताव को निरस्त नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन और आत्मदाह जैसे आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर होंगे। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि यदि कोई भी अप्रिय घटना घटती है, तो इसकी पूर्ण जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी।
प्रमुख मांगें:
- घटगढ़ में शराब की दुकान का निर्माण तत्काल रोका जाए।
- आबकारी विभाग अपने लिखित आश्वासन का पालन करे।
- क्षेत्र को ‘मद्य निषेध क्षेत्र’ घोषित करने की दिशा में कार्य हो।
“विश्वासघात बर्दाश्त नहीं! खुरपाताल की न्याय पंचायत में शराब नहीं, विकास चाहिए। 4 दिनों से हमारी माताएं-बहनें धरने पर हैं, लेकिन प्रशासन मौन है। क्या सरकार किसी अनहोनी का इंतजार कर रही है? होश में आओ प्रशासन!”
इतिहास गवाह है कि उत्तराखंड में चिपको आंदोलन से लेकर शराब विरोधी आंदोलनों तक, महिलाओं की भागीदारी ने ही बड़े बदलाव लाए हैं। घटगढ़ का यह विरोध प्रदर्शन भी उसी गौरवशाली परंपरा का हिस्सा है।
ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि टेंडर रद्द नहीं किया गया और प्रशासन ने जल्द सुध नहीं ली, तो वे 2027 चुनाव का पूर्ण बहिष्कार करेंगे ।फिलहाल ग्रामीण क्षेत्र में धरने प्रदर्शन में जुटे हुए है। धरने प्रदर्शन में दिवानसिह ,भारती ,कविता, राधा देवी, योगेश सिंह बिष्ट, कान्ती बिष्ट, सुनीता ,राधा देवी,नीमा देवी,कमला देवी,तुलसी देवी,दीपा अधिकारी,गंगा देवी,हीरासिंह अधिकारी,नंदन कोटलिया हेम बहुखण्डी ,रमा भट्ट, हेमलता ध्यानी ,भगवती ध्यानी,नीमा जोशी ,खमारी प्रधान हेम चंद्र बहुखंडी,,क्षेत्र पंचायत मंगोली मुकेश मेहरा ,प्रधान नलनी गोविंद अधिकारी, दीपक सिंह बिष्ट बाकी समस्त ग्ग्राम पंचायत वासी समेत तमाम ग्रामीण जुटे रहे।

