Old vs New Tax Regime: 12 लाख वाले करें मौज! 15 लाख की सैलरी पर अब कितना लगेगा Income Tax? आज ही जान लीजिए

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एक अप्रैल से देश में बहुत कुछ गया है, और काफी सारे बदलाव आने वाले दिनों में देखने को मिलेंगे. वैसे तो इनकम टैक्स (Income Tax) के मोर्चे पर वित्त 2025-26 में कई बड़े बदलाव देखने को मिले. 1 अप्रैल 2026 से न्यू टैक्स रिजीम के तहत 12 लाख रुपये तक की आय पर कोई इनकम टैक्स का प्रावधान नहीं है. लेकिन किसी कि सालाना सैलरी 15 लाख रुपये है, तो फिर उन्हें कितना टैक्स देना पड़ेगा?

दरअसल, आयकर विभाग के मुताबिक 97% ‘प्रिजम्पटिव टैक्स’ का लाभ उठाने वाले टैक्सपेयर्स ‘न्यू टैक्स रिजीम’ में शिफ्ट हो चुके हैं. इस कैटेगरी में छोटे कारोबारी और प्रोफेशनल्स आते हैं. जबकि आम टैक्सपेयर्स खासकर सैलरीड क्लास, जो कि ITR 1, 2, 3 और 4 भरते हैं.

इनका 88 फीसदी आंकड़ा न्यू टैक्स रिजीम में शिफ्ट हो चुके हैं. यानी अभी भी 12 फीसदी टैक्सपेयर्स ओल्ड टैक्स रिजीम के साथ हैं.

अब सवाल उठता है कि अभी भी ओल्ड टैक्स रिजीम के साथ कौन-कौन लोग हैं? आयकर विभाग की मानें तो अधिकतर ऐसे लोग हैं, जिन्होंने होम लोन (Home Loan) ले रखा है और वे 2 लाख रुपये तक के ब्याज पर छूट पा रहे हैं. इसके अलावा उनका निवेश (80C, 80D, HRA) बहुत ज्यादा है, और उनकी सैलरी 15-20 लाख रुपये से ऊपर है. जिन्हें पुराने निवेशों (LIC, PPF) से मिलने वाली टैक्स छूट नई व्यवस्था की कम दरों से ज्यादा फायदेमंद लग रही है.

मालूम हो कि सरकार पहले से ही न्यू टैक्स रिजीम (New Tax Regime) को डिफॉल्ट विकल्प बना चुकी है. ऐसे में अगर सैलरी 15 लाख रुपये सालाना है, तो आइए जानते है कि न्यू टैक्स रिजीम के हिसाब से कितना आयकर लगेगा. फिलहाल स्टैंडर्ड डिडक्शन को मिलाकर 12.75 लाख रुपये तक की सैलरी पर कोई आयकर नहीं लगता है. ये है गणित….

 

कुल सैलरी (Gross Salary): 15,00,000 रुपये
स्टैंडर्ड डिडक्शन (Standard Deduction): 75,000 रुपये माइनस
टैक्स योग्य आय (Taxable Income): 14,25,000 रुपये

स्लैब के अनुसार टैक्स (Slab-wise Breakup):
बेसिक टैक्स: 93,750 रुपये.
स्वास्थ्य एवं शिक्षा सेस (4% Cess): 3,750 रुपये.
कुल टैक्स (Total Tax Payable):97,500 रुपये.

बता दें, अगर आपकी सैलरी 12.75 लाख रुपये तक है, तो स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद आपकी टैक्सेबल इनकम 12 लाख रुपये रह जाती है, जिस पर 60,000 रुपये की रिबेट (धारा 87A) मिलने के कारण आपका टैक्स शून्य (0) हो जाता है.

अब ओल्ड टैक्स रिजीम के हिसाब से देखते हैं कि कितना टैक्स लगेगा?

ओल्ड टैक्स रिजीम के हिसाब से 15 लाख रुपये सालाना सैलरी में सबसे पहले 50,000 रुपये का स्टैंडर्ड डिडक्शन का घटा देंगे, जिससे टैक्सेबल इनकम 14.50 रुपये लाख रह जाती है. इसके बाद पुराने स्लैब के अनुसार टैक्स लगाया जाता है. 2.5 लाख तक कोई टैक्स नहीं, ₹2.5 से ₹5 लाख तक 5% (₹12,500), ₹5 से ₹10 लाख तक 20% (₹1,00,000) और ₹10 लाख से ऊपर ₹4.5 लाख पर 30% (₹1,35,000)। इस तरह कुल टैक्स ₹2,47,500 बनता है।

इसमें 4% स्वास्थ्य और शिक्षा cess जोड़ने पर कुल टैक्स करीब ₹2,57,400 हो जाता है।

ओल्ड टैक्स रिजीम में स्टैंडर्ड डिडक्शन के तहत 50,000 रुपये तक का छूट

मिलता है. इसे सबसे पहले अपनी आय में घटा दें.  (15,00,000-50,000= 14,50,000 रुपये), यानी अब 14.50 लाख रुपये टैक्स के दायरे में आता है.

उसके बाद आप 80C के तहत 1.5 लाख रुपये बचा सकते हैं. इसके लिए EPF, PPF, ELSS, NSC में निवेश करना होता है. आप दो बच्चों के ट्यूशन फीस में 1.5 लाख रुपये तक की रकम पर आयकर (Income Tax) छूट का लाभ उठा सकते हैं. अब आप डेढ़ लाख रुपये की आमदनी को भी घटा दें. (14,50,000- 1,50,000= 13,00,000 रुपये), अब

टैक्स के दायरे में साढ़े 13 लाख रुपये आता है.

अगर आप अलग से नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में सालाना 50,000 रुपये तक निवेश करते हैं, तो सेक्शन 80CCD (1B) के तहत  आपको अतिरिक्त 50 हजार रुपये Income Tax बचाने में मदद मिलती है. अब इस रकम को भी कुल आय में घटा दें. होम लोन (Home Loan) वाले अतिरिक्त 2 लाख रुपये बचा सकते हैं. अगर आपने होम लोन ले रखा है तो फिर इनकम टैक्स के सेक्शन 24B के तहत 2 लाख के ब्याज पर टैक्स

इसे भी आप सालाना आय में माइनस कर दें. (12,50,000-2,00,000= 10,50,000 रुपये).

अब केवल 10.50 लाख रुपये टैक्स में दायरे में आता है. इनकम टैक्स के सेक्शन 80D के तहत मेडिकल पॉलिसी लेकर आप 25 हजार रुपये तक टैक्स बचा सकते हैं. इस हेल्थ इंश्योरेंस में आपका, आपकी पत्नी और बच्चों का नाम होना चाहिए. इसके अलावा अगर आपके माता-पिता सीनियर सिटीजन (Senior Citizen) हैं तो फिर उनके नाम पर हेल्थ इंश्योरेंस (Health Insurance) खरीदकर 50,000 रुपये तक का अतिरिक्त डिडक्शन पा सकते हैं. लेकिन अगर उनकी उम्र 60 से कम है तो 25 हजार रुपये तक का क्लेम कर सकते हैं. हम यहां 25000 रुपये ही मानकर ही चल रहे हैं. (10,50,000- 50,000= 10,00,000 रुपये), यानी अब टैक्स देनदारी के दायरे में 10लाख रुपये की आमदनी आती है. ओल्ड टैक्स रिजीम के हिसाब से इस डिडक्शन के बाद अब आपका आयकर 1,17,00 रुपये बनता है.

अब जब दोनों की तुलना करते हैं तो न्यू टैक्स रिजीम के हिसाब  97,500 रुपये और ओल्ड टैक्स रिजीम के हिसाब 1,17 लाख रुपये टैक्स बनता है, यानी 15 लाख की  सालाना आय पर अब न्यू टैक्स  रिजीम बेहतर विकल्प है.

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