लखनऊ के इको गार्डन में प्रदर्शन करते 68500 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी

68500 शिक्षक भर्ती: 8 साल से न्याय की गुहार, इको गार्डन में भूख हड़ताल

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उत्तर प्रदेश की 68500 सहायक अध्यापक भर्ती एक बार फिर सुर्खियों में है। साल 2018 में शुरू हुई इस भर्ती के पीड़ित अभ्यर्थी पिछले आठ सालों से न्याय के लिए भटक रहे हैं। अभ्यर्थियों का आरोप है कि परीक्षा के परिणाम में आरक्षण के नियमों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया, जिसके कारण हजारों पात्र ओबीसी और आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी चयन प्रक्रिया से बाहर हो गए। वर्तमान में लखनऊ के इको गार्डन में अभ्यर्थियों का अनिश्चितकालीन आंदोलन और क्रमिक भूख हड़ताल जारी है।

क्या है 68500 शिक्षक भर्ती का पूरा विवाद?

उत्तर प्रदेश में साल 2018 में 68,500 सहायक अध्यापकों की भर्ती के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी। यह परीक्षा कुल 150 अंकों की थी। अभ्यर्थियों का आरोप है कि यूपी आरक्षण नियमावली-1994, बेसिक शिक्षा नियमावली और एनसीटीई (NCTE) की गाइडलाइंस को दरकिनार करते हुए सामान्य और आरक्षित वर्ग (OBC, दिव्यांग, भूतपूर्व सैनिक, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित) के लिए एक ही अर्हता मानक तय कर दिया गया। अभ्यर्थियों की मांग है कि ओबीसी को आरक्षित श्रेणी मानकर 150 में से 60 अंक (40%) के आधार पर परिणाम को संशोधित किया जाए और पात्रों को तुरंत नियुक्ति दी जाए।

आयोगों और कमेटियों ने माना संवैधानिक हक

पीड़ित अभ्यर्थियों ने अपने पक्ष में कई पुख्ता साक्ष्य प्रस्तुत किए हैं। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग और उत्तर प्रदेश विधान परिषद की सामाजिक न्याय एवं सद्भाव समिति ने भी अभ्यर्थियों के पक्ष में संस्तुति और आदेश जारी किए हैं। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने इस मामले में आरक्षण विसंगति को दूर कर परिणाम संशोधित करने का स्पष्ट आदेश दिया था, लेकिन शासन स्तर पर इस पर अमल नहीं हुआ।

मंत्रियों की बैठक में मानी गई गड़बड़ी, पर समाधान नहीं

इस मामले को लेकर 10 सितंबर 2026 को बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के आवास पर एक उच्चस्तरीय बैठक हुई थी। इस बैठक में माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी और विभाग के प्रमुख सचिव सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। अभ्यर्थियों का दावा है कि बैठक में मंत्रियों और अधिकारियों ने आरक्षण में गड़बड़ी होने की बात स्वीकार की थी और कहा था कि अब इस मामले में न्याय सिर्फ मुख्यमंत्री स्तर से ही संभव है। हालांकि, इस आश्वासन के बाद भी अब तक कोई ठोस लिखित निर्णय नहीं लिया गया है।

लखनऊ में 'दस्तक दो अभियान' और भूख हड़ताल

न्याय न मिलने से नाराज अभ्यर्थी लखनऊ के इको गार्डन में पिछले दो महीनों से अधिक समय से धरना दे रहे हैं। 26 अक्टूबर 2026 से अभ्यर्थियों ने क्रमिक भूख हड़ताल शुरू कर दी है, जिसमें कई आंदोलनकारियों की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। अपने 'दस्तक दो अभियान' के तहत अभ्यर्थियों ने उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल, कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर और डॉ. संजय निषाद समेत कई दिग्गज नेताओं को ज्ञापन सौंपा है। इसके अलावा अभ्यर्थियों ने एससीईआरटी (SCERT) कार्यालय और विधानसभा के सामने भी प्रदर्शन किया है।

मुख्यमंत्री के फैसले पर टिकी निगाहें

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे आशुतोष वर्मा, तूफान सिंह और धरना प्रभारी नवीन चौधरी का कहना है कि जब आयोग और विभाग दोनों ही विसंगति को स्वीकार कर चुके हैं, तो शासन स्तर से नियुक्ति शेड्यूल जारी करने में देरी क्यों हो रही है। अभ्यर्थियों ने दोटूक चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही नियुक्ति का संशोधित शेड्यूल जारी नहीं किया गया, तो वे लखनऊ की सड़कों पर ही अपना आंदोलन और तेज करेंगे। अब यह पूरा मामला सीधे मुख्यमंत्री के अंतिम निर्णय पर आकर टिक गया है।

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