उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्लॉट और आवासीय सुविधाएं देने के नाम पर धोखाधड़ी करने वाली रियल एस्टेट कंपनियों की मनमानी थमने का नाम नहीं ले रही है। ताजा मामला गोमती नगर विस्तार के वरदान खंड में संचालित 'राजधानी इंफ्रा हाउसिंग प्राइवेट लिमिटेड' कंपनी का सामने आया है। कंपनी पर आरोप है कि उसने एक ग्राहक से छह साल पहले लाखों रुपये जमा करा लिए, लेकिन आज तक न तो उन्हें प्लॉट आवंटित किया गया और न ही उनकी जमा पूंजी वापस की गई। परेशान होकर पीड़ित ने लखनऊ के जिलाधिकारी (DM) को लिखित प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जानकीपुरम सेक्टर-एच के रहने वाले नवनीत कुमार (पुत्र शारदा प्रसाद) ने अप्रैल 2017 में इस कंपनी के माध्यम से एक प्लॉट बुक कराया था। बुकिंग के बाद उन्होंने तय शर्तों के मुताबिक 9,375 रुपये प्रतिमाह की किस्तें जमा करना शुरू कर दिया था। पीड़ित का आरोप है कि कंपनी के प्रतिनिधियों ने उन्हें आश्वासन दिया था कि पांच साल के भीतर जमीन को पूरी तरह विकसित कर उन्हें प्लॉट का कब्जा सौंप दिया जाएगा।
चार साल तक किस्त देने के बाद भी नहीं हुआ विकास कार्य
शिकायतकर्ता नवनीत कुमार ने बताया कि उन्होंने लगभग चार सालों तक लगातार अपनी मेहनत की कमाई से किस्तें जमा कीं। इसके बावजूद जब उन्होंने देखा कि साइट पर कंपनी द्वारा कोई भी विकास कार्य शुरू नहीं किया गया है, तो उन्होंने आगे की किस्तें रोक दीं। नवनीत ने कंपनी प्रबंधन के सामने प्रस्ताव रखा कि वे रजिस्ट्री और कब्जे के समय बाकी की पूरी रकम एक साथ चुका देंगे। लेकिन छह साल से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी कंपनी ने उन्हें प्लॉट नहीं दिया। पीड़ित के मुताबिक, कंपनी अब तक उनके द्वारा जमा किए गए 3,93,750 रुपये भी वापस नहीं कर रही है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि कंपनी के संचालक राजदेव यादव और उनके प्रतिनिधि ग्राहक को लगातार टाल रहे हैं। हर बार रजिस्ट्री की एक नई तारीख दे दी जाती है और पीड़ित पर अतिरिक्त पैसे जमा करने का दबाव भी बनाया जा रहा है। जब पीड़ित ने गोमती नगर विस्तार स्थित कार्यालय में संपर्क करने का प्रयास किया, तो उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
पीड़ित परिवार ने जिला प्रशासन से लगाई न्याय की गुहार
नवनीत कुमार ने जिलाधिकारी को दिए गए अपने प्रार्थना पत्र में बताया कि उनका परिवार इस समय बेहद कठिन आर्थिक परिस्थितियों से गुजर रहा है। उनके जीवनभर की गाढ़ी कमाई इस प्लॉट के चक्कर में फंसी हुई है, जिससे पूरा परिवार मानसिक रूप से परेशान है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि उनकी जमा राशि उचित ब्याज के साथ वापस दिलाई जाए या फिर कंपनी से तत्काल प्लॉट की रजिस्ट्री और कब्जा दिलाया जाए।
अब इस मामले में सबसे बड़ा सवाल जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर उठता है कि क्या वे इस गंभीर शिकायत की निष्पक्ष जांच करेंगे? क्या गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को धोखाधड़ी करने वाली ऐसी रियल एस्टेट कंपनियों से उनकी रकम वापस मिल पाएगी? अब देखना यह होगा कि लखनऊ जिला प्रशासन इस पर क्या सख्त कानूनी कदम उठाता है।


