दिल्ली के कनॉट प्लेस और जंतर-मंतर पर तैनात दिल्ली पुलिस के जवान और सुरक्षा बैरिकेड्स

दिल्ली में CJP का तिरंगा मार्च, सुरक्षा व्यवस्था और कारोबारियों के नुकसान पर SC सख्त

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राजधानी दिल्ली के व्यापारिक और राजनीतिक केंद्र कनॉट प्लेस (सीपी) और जंतर-मंतर पर सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद कर दिया गया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित 'तिरंगा मार्च' (Lehra Do Tiranga) और विरोध प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों (CAPF) की भारी तैनाती की गई है। चप्पे-चप्पे पर करीब 25,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। इसके साथ ही, सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (NDMC) ने कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क को दो दिनों के लिए पूरी तरह बंद कर दिया है।

इस भारी घेराबंदी और बंदी के खिलाफ व्यापारियों के संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। त्यौहारों और शादियों के इस सीजन में बाजारों के बंद होने से हो रहे भारी नुकसान को लेकर दायर याचिका पर देश की शीर्ष अदालत ने बेहद तल्ख और गंभीर टिप्पणियां की हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने जताई कारोबारियों के नुकसान पर चिंता

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने दिल्ली के व्यापारी संघों की याचिका पर सुनवाई की। अदालत ने तात्कालिक राहत के तौर पर कोई अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार कर दिया, लेकिन साफ लहजे में कहा कि विरोध प्रदर्शन के अधिकार और व्यापारियों की आजीविका के बीच संतुलन होना बेहद जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "हम उम्मीद करते हैं कि सभी पक्षों को सद्बुद्धि आएगी। त्योहारों के इन दिनों में छोटे दुकानदार और रेहड़ी-पटरी वाले अपनी आजीविका कमाते हैं। हम पूरी तरह से वाकिफ हैं कि इस तरह की अचानक तालाबंदी और बैरिकेडिंग से पूरे परिवारों को कितनी कठिनाई और आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता है।"

भारी नुकसान होने पर मुआवजे की चेतावनी

अदालत ने सुनवाई के दौरान कानून व्यवस्था और व्यापारिक हितों को आपस में जुड़ा हुआ बताया। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा, "कोई विरोध प्रदर्शन करना चाहता है, कोई मूंगफली बेचना चाहता है, तो कोई कानून व्यवस्था चाहता है; ये सभी चीजें आपस में जुड़ी हुई हैं। यदि इस प्रदर्शन और सरकारी पाबंदियों के कारण व्यापारियों के व्यापार को गैर-कानूनी ढंग से नुकसान पहुंचता है, तो अदालत अपनी संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल करेगी।"

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि एनडीएमसी या पुलिस द्वारा लगाए गए प्रतिबंध असंगत (Disproportionate) पाए जाते हैं, तो अदालत मुआवजा कानून के तहत व्यापारियों को हर्जाना दिलाने की कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगी। शीर्ष अदालत ने इस मामले को अब विस्तार से सुनवाई के लिए दशहरे की छुट्टियों के बाद 26 या 27 अक्टूबर के लिए सूचीबद्ध किया है।

क्यों हो रहा है CJP का यह प्रदर्शन?

दरअसल, सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने इस 'तिरंगा मार्च' का आह्वान पार्टी के दो नेताओं (सौरव दास और आशुतोष रांका) की गिरफ्तारी के विरोध में किया है। इन नेताओं को जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने (De-notified) के बावजूद वहां राष्ट्रीय ध्वज फहराने और शांति भंग करने के आरोप में तिहाड़ जेल भेजा गया है। दिल्ली पुलिस ने इस मार्च को अवैध बताते हुए आयोजकों को नोटिस जारी किया था, लेकिन प्रदर्शनकारी सेंट्रल पार्क में जुटने पर अड़े रहे। दूसरी तरफ, दिल्ली के कनॉट प्लेस और खान मार्केट के एसोसिएशनों का दावा है कि इन प्रदर्शनों और बंद के कारण उन्हें प्रतिदिन करोड़ों रुपये का व्यापारिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।

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