28 अप्रैल 2026 की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, अजय पाल शर्मा उत्तर प्रदेश कैडर के 2011 बैच के एक चर्चित IPS अधिकारी हैं, जिन्हें वर्तमान में चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए पुलिस ऑब्जर्वर (Police Observer) नियुक्त किया है।
उनकी बंगाल में एंट्री और हालिया कार्रवाई ने राज्य में सियासी पारा गरमा दिया है। इस विवाद के मुख्य कारण नीचे दिए गए हैं:
1. विवाद का मुख्य कारण: TMC नेता को खुली चुनौती
अजय पाल शर्मा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वे दक्षिण 24 परगना जिले के फलता (Falta) निर्वाचन क्षेत्र में TMC उम्मीदवार जहांगीर खान के घर पहुंचे।
- सख्त चेतावनी: निवासियों द्वारा मतदाताओं को धमकाने की शिकायत मिलने पर शर्मा ने सीधे जहांगीर खान के परिजनों और समर्थकों से कहा, “जहांगीर को बता देना, अगर उसने लोगों को डराया या धमकाया, तो हम कानून के मुताबिक उनसे सख्ती से निपटेंगे”।
- सुरक्षा पर सवाल: उन्होंने जहांगीर खान की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों की संख्या पर भी सवाल उठाए और नियमों के उल्लंघन के लिए स्थानीय SP से जवाब मांगा।
2. अखिलेश यादव और TMC के सवाल
समाजवादी पार्टी (SP) के प्रमुख अखिलेश यादव और तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने उनकी नियुक्ति पर कड़े सवाल उठाए हैं:
- बीजेपी का एजेंट: अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया (X) पर वीडियो शेयर करते हुए उन्हें “बीजेपी का एजेंट” बताया और आरोप लगाया कि चुनाव आयोग जानबूझकर ऐसे अफसरों को तैनात कर रहा है जो बीजेपी के एजेंडे को लागू कर सकें।
- ‘ठोक दो’ मानसिकता: अखिलेश ने उनके “एनकाउंटर स्पेशलिस्ट” होने और उनकी “ठोक दो” कार्यशैली (थोक-दो एटीट्यूड) पर निशाना साधते हुए इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया।
- TMC की आपत्ति: TMC ने उन्हें योगी आदित्यनाथ का “फेवरेट एनकाउंटर स्पेशलिस्ट” बताते हुए चुनाव आयोग से शिकायत की है कि उन्हें मतदाताओं को डराने के लिए भेजा गया है।
3. कौन हैं IPS अजय पाल शर्मा? (प्रोफाइल)
- पद और पहचान: वे वर्तमान में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में Joint Commissioner of Police (JCP) के पद पर तैनात हैं। उन्हें उत्तर प्रदेश में ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ और ‘सिंघम’ के नाम से जाना जाता है।
- बैकग्राउंड: लुधियाना (पंजाब) के रहने वाले शर्मा पेशे से पहले एक डेंटिस्ट (डॉक्टर) थे।
- चर्चा में क्यों: उनके नाम 100 से अधिक अपराधियों को एनकाउंटर में पकड़ने या घायल करने का रिकॉर्ड है। वे रामपुर के चर्चित बलात्कार और हत्या मामले में आरोपी को सरेआम गोली मारने के कारण भी काफी सुर्खियों में रहे थे।
फिलहाल, 29 अप्रैल को बंगाल में होने वाले अंतिम चरण के मतदान से पहले उनकी मौजूदगी ने चुनाव आयोग और विपक्षी दलों के बीच एक नई कूटनीतिक और कानूनी जंग छेड़ दी है।

